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    ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ पर मांगी माफी, NCERT ने बताया ‘निर्णय की त्रुटि’

    राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक को लेकर उपजा विवाद अब गहरा गया है। इस पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ (Corruption in the Judiciary) से संबंधित एक अंश शामिल किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

    मुख्य विवाद क्या है?

    विवाद की जड़ कक्षा 8 की नई किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ (Exploring Society: India and Beyond) का अध्याय 4 है, जिसका शीर्षक ‘समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ है।

    • विवादास्पद अंश: इस अध्याय में न्यायपालिका के समक्ष चुनौतियों का जिक्र करते हुए ‘विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार’ को एक बड़ी बाधा बताया गया था। इसमें कहा गया था कि भ्रष्टाचार और मुकदमों का बोझ न्याय तक पहुँच को कठिन बना देता है।
    • सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर स्वत: संज्ञान (Suo Motu) लिया। CJI ने इसे न्यायपालिका की छवि खराब करने वाला और ‘सुनियोजित हमला’ करार दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को छात्रों के मन में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान पैदा करना चाहिए, न कि उन्हें बदनाम करना चाहिए।

    NCERT की प्रतिक्रिया और माफी

    सुप्रीम कोर्ट की फटकार और शिक्षा मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद NCERT ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है।

    परिषद ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इसे ‘निर्णय की त्रुटि’ (Error of Judgment) बताया और बिना शर्त माफी मांगी है। NCERT ने तत्काल प्रभाव से इस पुस्तक की छपाई और वितरण पर रोक लगा दी है। साथ ही, इसे अपनी आधिकारिक वेबसाइट से भी हटा लिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संबंधित अध्याय को विशेषज्ञों के परामर्श से दोबारा लिखा जाएगा और शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए नई संशोधित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

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