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    ‘घुसपैठ मुक्त सीमांचल’ का संकल्प दोहराया, अमित शाह बोले-घुसपैठियों को बाहर करेंगे

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने तीन दिवसीय बिहार दौरे के दूसरे दिन आज अररिया पहुंचे। सीमांचल क्षेत्र के रणनीतिक महत्व को देखते हुए उन्होंने भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और ‘घुसपैठ मुक्त सीमांचल’ का संकल्प दोहराया।

    अररिया में शाह का बड़ा प्रहार: “घुसपैठिए देश की सुरक्षा के लिए खतरा”

    अररिया के लेटी (Letti) में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के 52वीं वाहिनी मुख्यालय के प्रशासनिक भवन का लोकार्पण करने के बाद गृह मंत्री ने एक जनसभा को संबोधित किया। उनके भाषण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:

    • घुसपैठियों को बाहर करने का मिशन: अमित शाह ने कड़े शब्दों में कहा कि सीमांचल के जिलों (अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार) में अवैध घुसपैठ के कारण जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) एक गंभीर चिंता है। उन्होंने घोषणा की कि जल्द ही एक विशेष मिशन के तहत प्रत्येक घुसपैठिए की पहचान कर उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर किया जाएगा।
    • पश्चिम बंगाल चुनाव का जिक्र: गृह मंत्री ने कहा कि सीमांचल का प्रभाव सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल से जुड़ा है। उन्होंने विश्वास जताया कि बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत के साथ ही पूरे पूर्वी भारत से घुसपैठियों को खदेड़ने का काम शुरू हो जाएगा।
    • सुरक्षा समीक्षा बैठक: शाह ने सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। इसमें घुसपैठ रोकने के लिए इंटेलिजेंस शेयरिंग और तकनीकी निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

    वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (Vibrant Village Programme)

    अमित शाह ने सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2’ की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सीमा पर स्थित गांव देश की ‘पहली रक्षा पंक्ति’ हैं। सरकार का लक्ष्य इन गांवों में सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य की विश्वस्तरीय सुविधाएं पहुंचाना है ताकि वहां से पलायन रुके और सुरक्षा और मजबूत हो।

    सुरक्षा अलर्ट

    गृह मंत्री के दौरे को देखते हुए भारत-नेपाल और भारत-बांग्लादेश सीमा पर हाई अलर्ट जारी किया गया है। एसएसबी और बीएसएफ के जवानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। अमित शाह का यह दौरा न केवल सुरक्षा के लिहाज से, बल्कि आगामी चुनावों के मद्देनजर ध्रुवीकरण और वोट बैंक की राजनीति के केंद्र में रहने वाले ‘घुसपैठ’ के मुद्दे को हवा देने के रूप में भी देखा जा रहा है।

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