पश्चिम एशिया में तनाव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरानी तेल ले जाने वाले चीनी टैंकरों को रोकने के लिए नौसैनिक घेराबंदी (Blockade) का ऐलान किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट (Scott Bessent) के हालिया बयानों ने बीजिंग और वाशिंगटन के बीच सीधे टकराव की आशंका बढ़ा दी है।
अमेरिका की नई रणनीति: ‘जीरो ऑयल’ नीति
ट्रम्प प्रशासन के तहत, अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए उसके तेल निर्यात को पूरी तरह ठप करने का निर्णय लिया है।
- चीनी टैंकरों पर निशाना: चीन, ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। बेसेन्ट ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी नौसेना अब उन चीनी टैंकरों को रोकेगी जो प्रतिबंधों का उल्लंघन कर ईरानी तेल ले जा रहे हैं।
- घेराबंदी का उद्देश्य: अमेरिका का लक्ष्य ईरान की आय के मुख्य स्रोत को बंद करना है। बेसेन्ट ने कहा, “उन्हें तेल मिल सकता है, लेकिन ईरानी तेल नहीं।”
होर्मुज में महाशक्तियों का टकराव
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है।
- चीन की चेतावनी: शी जिनपिंग प्रशासन ने पहले ही चेतावनी दी है कि चीनी जहाजों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन होगी। चीन इसे अपनी ‘ऊर्जा सुरक्षा’ पर हमला मान रहा है।
- ईरान का रुख: ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने धमकी दी है कि यदि अमेरिका ने उनके टैंकरों को रोका, तो वे पूरे होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर देंगे, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।
युद्ध जैसे हालात और आर्थिक प्रभाव
क्षेत्र में अमेरिकी और चीनी नौसेनाओं की बढ़ती मौजूदगी ने ‘बैटल ऑफ होर्मुज’ जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
- तेल की कीमतों में उछाल: इस तनाव की खबर मात्र से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50% तक की वृद्धि देखी गई है।
- शिपिंग में व्यवधान: कई टैंकरों ने अपना रास्ता बदल लिया है। हाल ही में ‘रिच स्टारी’ (Rich Starry) जैसे चीनी टैंकरों को अमेरिकी घेराबंदी के डर से जलडमरूमध्य के पास से यू-टर्न लेते देखा गया।
- यदि अमेरिका अपनी इस सैन्य घेराबंदी को सख्ती से लागू करता है, तो यह केवल एक आर्थिक प्रतिबंध नहीं बल्कि एक नौसैनिक युद्ध (Naval Warfare) की शुरुआत हो सकती है। चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान पर काफी हद तक निर्भर है, ऐसे में वह पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या कूटनीति इस संभावित संघर्ष को टाल पाएगी या होर्मुज की लहरों पर दो महाशक्तियां आपस में भिड़ेंगी।


