अलीगढ़ के एक सरकारी स्कूल के छात्रों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए विज्ञान और नवाचार की एक अद्भुत मिसाल पेश की है। अलीगढ़ के कंपोजिट विद्यालय, इगलास के होनहार बच्चों ने न केवल कागजी मॉडल बनाए, बल्कि असली फाइटर जेट की तकनीक पर आधारित एक ‘उड़ने वाला रैप्टर मॉडल’ तैयार किया है।
क्या है यह अनोखा मॉडल?
छात्रों द्वारा तैयार किया गया यह मॉडल किसी खिलौने जैसा नहीं, बल्कि एक पूर्णतः कार्यात्मक (Functional) एयरक्राफ्ट है।
- प्रेरणा: बच्चों ने फाइटर जेट्स, विशेष रूप से ‘रैप्टर’ (F-22 Raptor) की एयरोडायनामिक्स (Aerodynamics) और बनावट का बारीकी से अध्ययन किया।
- सफलता: परीक्षण के दौरान, यह मॉडल सैकड़ों मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सफल रहा। स्कूल के खेल के मैदान में जब इसे उड़ाया गया, तो शिक्षकों और ग्रामीणों की भीड़ इसे देख दंग रह गई।
- तकनीक: इसमें रिमोट कंट्रोल सिस्टम और आधुनिक संतुलन (Balancing) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। छात्रों ने इसे अपने स्कूल के विज्ञान प्रयोगशाला (Science Lab) में उपलब्ध सीमित संसाधनों से ही तैयार किया है।
शिक्षकों का मार्गदर्शन और छात्रों की मेहनत
इस सफलता के पीछे विज्ञान शिक्षक अजय प्रताप सिंह और उनकी टीम का विशेष योगदान है। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों के बच्चों में भी वही प्रतिभा है जो बड़े निजी संस्थानों के बच्चों में होती है, बस उन्हें सही दिशा और अवसर की आवश्यकता है। कक्षा 7वीं और 8वीं के करीब 10 छात्रों की एक टीम ने पिछले 3 महीनों तक इस प्रोजेक्ट पर काम किया। इस मॉडल को बनाने के दौरान बच्चों ने भौतिकी (Physics) के सिद्धांतों, जैसे कि ‘बर्नौली का सिद्धांत’ (Bernoulli’s Principle) और गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव को व्यावहारिक रूप से समझा।
सफलता का संदेश
इस उपलब्धि पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने छात्रों को सम्मानित करते हुए कहा कि यह मॉडल सरकार की ‘अटल टिंकरिंग लैब’ (Atal Tinkering Lab) पहल की सफलता का प्रमाण है। अलीगढ़ के इन नन्हे वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े बच्चे भी भविष्य के बेहतरीन इंजीनियर और वैज्ञानिक बन सकते हैं।
“हमारा लक्ष्य सिर्फ उड़ने वाला मॉडल बनाना नहीं था, बल्कि यह समझना था कि विमान हवा में कैसे टिकते हैं,” 8वीं कक्षा के छात्र राहुल ने गर्व से कहा।
ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूल की इस सफलता ने साबित कर दिया है कि यदि बच्चों की जिज्ञासा को सही मंच मिले, तो वे आसमान की ऊंचाइयों को छूने का हौसला रखते हैं।


