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    अजित पवार ​6 बार बने उपमुख्यमंत्री, चार दशक तक महाराष्ट्र के रहे ‘दादा’

    महाराष्ट्र की राजनीति में ‘दादा’ के नाम से मशहूर अजित पवार का सफर सहकारी क्षेत्र से शुरू होकर राज्य के उपमुख्यमंत्री पद के शिखर तक पहुँचा। 22 जुलाई 1959 को जन्मे अजित पवार ने करीब चार दशक तक सक्रिय राजनीति की और बारामती को अपना अभेद्य किला बनाया।

    6 बार बने उपमुख्यमंत्री: एक अनोखा रिकॉर्ड

    अजित पवार के नाम महाराष्ट्र में सबसे अधिक 6 बार उपमुख्यमंत्री (DCM) बनने का रिकॉर्ड दर्ज है। उनका कार्यकाल राजनीति के उतार-चढ़ाव की एक मिसाल रहा है:

    • सबसे छोटा कार्यकाल: नवंबर 2019 में देवेंद्र फडणवीस के साथ उन्होंने केवल 5 दिन के लिए उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
    • सबसे लंबा कार्यकाल: उद्धव ठाकरे की सरकार (MVA) के दौरान उन्होंने 2 साल 182 दिन तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली।
    • ​इसके अलावा वे पृथ्वीराज चव्हाण और एकनाथ शिंदे की सरकारों में भी इस महत्वपूर्ण पद पर रहे।

    बारामती के ‘दादा’ और विकास पुरुष

    अजित पवार को उनकी प्रशासनिक पकड़ और स्पष्टवादिता के लिए जाना जाता था। ब्यूरोक्रेसी पर उनकी जबरदस्त पकड़ थी, जिससे उन्हें काम करवाने वाले नेता के रूप में पहचान मिली। बारामती से वे 9 बार विधानसभा चुनाव जीते। 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी पत्नी की हार के बावजूद, उन्होंने बारामती विधानसभा सीट नहीं छोड़ी, जो उनके अपने क्षेत्र के प्रति लगाव को दर्शाता है।

    व्यक्तिगत विवरण और राजनीतिक प्रोफाइल:

    • पूरा नाम: अजित आशाताई अनंतराव पवार।
    • शिक्षा: बी.कॉम (राजनीति में आने से पहले वे खेती से जुड़े थे)।
    • राजनीतिक गुरु: अपने चाचा शरद पवार से राजनीति के गुर सीखे, हालांकि बाद के वर्षों में उन्होंने वैचारिक मतभेदों के कारण अपनी राह अलग कर ली और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष बने।
    • रुचियां: उन्हें क्रिकेट और टेनिस का काफी शौक था। समाज सेवा और ग्रामीण महाराष्ट्र का विकास उनकी प्राथमिकता रही।

    ​अजित पवार ने न केवल राज्य के वित्त और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले, बल्कि वे महाराष्ट्र ओलंपिक एसोसिएशन और कई सहकारी संस्थाओं के अध्यक्ष भी रहे। 28 जनवरी 2026 को बारामती में एक दुखद प्लेन क्रैश में उनका असमय निधन हो गया, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का अंत हो गया। उनके विरोधी भी मानते थे कि प्रशासन चलाने की जो कुशलता ‘दादा’ में थी, उसकी भरपाई करना मुश्किल है।

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