अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उसे अमेरिका के साथ अपने व्यापार पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ (शुल्क) देना होगा। इस फैसले का सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता है क्योंकि भारत ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक है।
प्रमुख बिंदु और भारत पर प्रभाव
1. टैरिफ की दोहरी मार भारत पहले से ही अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च टैरिफ का सामना कर रहा है। वर्तमान में भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों पर कुल 50% तक टैरिफ लग रहा है, जिसमें:
- 25% रेसिप्रोकल टैरिफ: (पारस्परिक शुल्क)
- 25% दंड शुल्क: जो रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण लगाया गया है। अब ईरान से व्यापार के कारण यदि यह नया 25% शुल्क भी लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।
2. प्रभावित होने वाले भारतीय क्षेत्र (Sectors) भारत ईरान को बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद और दवाएं निर्यात करता है। इस नए प्रतिबंध से निम्नलिखित क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है:
- निर्यात: बासमती चावल, चाय, चीनी, दवाएं (Pharmaceuticals), इलेक्ट्रिकल मशीनरी और कृत्रिम आभूषण।
- आयात: सूखे मेवे (Dry Fruits), कार्बनिक/अकार्बनिक रसायन और कांच का सामान।
3. चाबहार पोर्ट और रणनीतिक संकट भारत के लिए ईरान का चाबहार पोर्ट रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँचने का भारत का मुख्य रास्ता है। यदि अमेरिका इस पोर्ट के संचालन पर दी गई छूट (Waiver) को वापस लेता है, तो भारत के करोड़ों डॉलर के निवेश और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर खतरा मंडरा सकता है।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप ‘टैरिफ’ को एक भू-राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि भारत जैसे देशों को अपनी विदेश नीति (जैसे रूस और ईरान के साथ संबंध) बदलने पर मजबूर किया जा सके। हालाँकि, भारत ने हमेशा अपनी ऊर्जा सुरक्षा और संप्रभुता को प्राथमिकता देने की बात कही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को बरकरार रखते हुए ईरान के साथ व्यापार जारी रखता है या अमेरिका के दबाव में इसमें कटौती करता है।


