नॉर्वे के एक प्रमुख अखबार द्वारा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक नस्लवादी और रूढ़िवादी (Racist and Stereotypical) कार्टून छापे जाने के बाद एक नया अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा हो गया है। नॉर्वे के दैनिक समाचार पत्र ‘आफ्टेनपोस्टेन’ (Aftenposten) में प्रकाशित इस कार्टून में पीएम मोदी को एक सपेरे के रूप में दिखाया गया है, जो एक टोकरी के सामने बैठकर बीन बजा रहे हैं और टोकरी से सांप की जगह पेट्रोल पंप का नोजल-पाइप निकलता हुआ दिखाई दे रहा है।
इस कार्टून के सामने आने के बाद भारत और दुनिया भर के विशेषज्ञों, पत्रकारों और सोशल मीडिया यूजर्स ने अखबार की इस हरकत की तीखी आलोचना की है।
विवाद की मुख्य वजह और ‘विकृत सोच’ पर हमला
अखबार ने यह कार्टून एक ओपिनियन आर्टिकल के साथ प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था— “एक चालाक और थोड़ा परेशान करने वाला आदमी”। इस कार्टून को लेकर भू-राजनीतिक विशेषज्ञों (Geopolitical Experts) का कहना है कि यह पश्चिमी मीडिया की भारत को लेकर सदियों पुरानी और विकृत औपनिवेशिक मानसिकता (Colonial Mindset) को दर्शाता है।
आलोचकों का मानना है कि 21वीं सदी में भारत को ‘सपेरों के देश’ के रूप में चित्रित करना न केवल अत्यधिक आपत्तिजनक है, बल्कि यह एक उभरती हुई वैश्विक और तकनीकी महाशक्ति के प्रति पश्चिमी जगत की ईर्ष्या और अज्ञानता को भी उजागर करता है।
प्रेस ब्रीफिंग से शुरू हुआ पूरा मामला
यह पूरा विवाद पीएम मोदी के नॉर्वे के आधिकारिक सरकारी दौरे के दौरान शुरू हुआ। प्रेस ब्रीफिंग के दौरान नॉर्वे की एक पत्रकार हेले लिंग ने प्रधानमंत्री से सवाल पूछने की कोशिश की थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। इसके बाद पश्चिमी मीडिया ने आरोप लगाया कि भारतीय पीएम सवालों से बच रहे हैं। इस विवाद के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्थिति स्पष्ट की। मंत्रालय की तरफ से एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई, जिसमें मीडिया के सभी सवालों के पारदर्शी तरीके से जवाब दिए गए और यह साफ किया गया कि कूटनीतिक प्रोटोकॉल के तहत ही सभी कार्यक्रम तय किए गए थे। फिलहाल, इस नस्लवादी कार्टून को लेकर भारतीय राजनयिक हलकों और प्रवासी भारतीयों (Diaspora) में भारी नाराजगी है, और सोशल मीडिया पर नॉर्वेजियन मीडिया से माफी की मांग की जा रही है।


