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    तानाशाह बन रहे असीम मुनीर को झटका: CDF नोटिफिकेशन में देरी

    पाकिस्तान के सेना प्रमुख (COAS) फील्ड मार्शल असीम मुनीर को एक बड़ा झटका लगा है। विवादास्पद 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद, उन्हें देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) या ‘सुपर कमांडर’ के रूप में नियुक्त किया जाना था, जिससे उनकी शक्तियाँ अभूतपूर्व रूप से बढ़ जातीं। हालांकि, CDF पद के लिए डेडलाइन बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी नहीं की गई है, जिससे उनकी संवैधानिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।

    क्यों महत्वपूर्ण है यह देरी?

    • शक्ति का केंद्रीकरण: 27वां संवैधानिक संशोधन पाकिस्तान की तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) को सीधे CDF के अधीन लाता है। यह पद सेना प्रमुख को अन्य दो सेना प्रमुखों से ऊपर रखता है और उन्हें परमाणु हथियारों की देखरेख करने वाली राष्ट्रीय सामरिक कमान (NSC) पर भी नियंत्रण देता है।
    • कार्यकाल में विस्तार: इस संशोधन का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि सेना प्रमुख (COAS) ही CDF का पद भी संभालेंगे, जिससे उनका कार्यकाल उनकी वास्तविक सेवानिवृत्ति तिथि (27 नवंबर 2027) से बढ़कर कम से कम 2030 तक सुरक्षित हो जाएगा।
    • संवैधानिक स्थिति: 27 नवंबर को जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (CJCSC) के चेयरमैन का पद समाप्त हो गया, जिसे CDF के पद से बदला जाना था। अधिसूचना जारी न होने से असीम मुनीर की संवैधानिक स्थिति को लेकर उहापोह की स्थिति बन गई है।

    देरी का कारण: ‘बारीक विवरण’

    • मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार इस नियुक्ति के ‘बारीक विवरण’ (Finer Details) पर काम कर रही है, जिसके कारण औपचारिकता में देरी हो रही है।
    • बताया जा रहा है कि नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट में अभी तक संशोधन नहीं किया गया है और जॉइंट सर्विसेज हेडक्वार्टर का ढांचा भी अभी स्पष्ट नहीं है। सरकार इस नए ‘सुपर कमांडर’ पद की शक्तियों और कार्यों को विधायी रूप से पूरी तरह स्पष्ट करने में समय ले रही है।
    • अधिसूचना में देरी के कारण पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य गलियारों में चिंता बढ़ गई है कि क्या असीम मुनीर का सुपर कमांडर बनने का सपना टूट सकता है, या यह केवल एक अस्थायी प्रशासनिक बाधा है।

    क्या हुआ है अब तक?

    • पाकिस्तान की संसद ने 12 नवंबर को 27वें संवैधानिक संशोधन को पारित किया और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी इस पर हस्ताक्षर करके इसे कानून बना दिया था।
    • 27 नवंबर को CJCSC का पद समाप्त हो गया था।

    फ़िलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान सरकार यह अधिसूचना कब जारी करती है और क्या असीम मुनीर पांच साल के लिए CDF के रूप में अपनी संवैधानिक शक्तियों को संभाल पाते हैं।

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