दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजामों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश में ब्रिटिश शासन चल रहा है? राउत ने कहा कि विरोध करना जनता का अधिकार है और सरकार किसी की आवाज को दबा नहीं सकती।
ट्रेनों पर रोक और सीमाओं पर बैरिकेडिंग को लेकर सवाल
संजय राउत ने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शन को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने कहा कि युवाओं और विभिन्न संगठनों के सदस्यों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए हिरासत में लिया जा रहा है। दिल्ली की सीमाओं पर बैरिकेडिंग की गई है और कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश तथा निकास द्वार बंद किए गए हैं।
राउत के मुताबिक, बड़ी संख्या में युवा और दूसरे संगठनों के सदस्य दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल होना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को जनता की मांग सुननी चाहिए, न कि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए इतनी सख्ती करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बलों को बुलाकर राजधानी में तैनात किया गया है। राउत ने कहा कि जनता के आंदोलन को केवल सुरक्षा बलों के जरिए नहीं दबाया जा सकता।
सीजेपी क्यों कर रही है प्रदर्शन?
कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रही है। संगठन का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। पुलिस का कहना है कि आयोजकों ने निर्धारित समय से काफी कम समय पहले सूचना दी थी। अधिकारियों ने पहले के प्रदर्शन के दौरान निर्देशों के कथित उल्लंघन और कानून-व्यवस्था तथा यातायात संबंधी चिंताओं का भी हवाला दिया।
कई प्रदर्शनकारी हिरासत में
10 अक्तूबर को दिल्ली में प्रदर्शन से पहले और उसके दौरान कई स्थानों पर पुलिस ने लोगों को हिरासत में लिया। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के 400 से अधिक सदस्यों को हिरासत में लिए जाने का दावा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने किया। सुप्रीम कोर्ट के पास जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे कई वकीलों को भी रोका गया।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और संगठन के अन्य नेताओं को भी दिल्ली पहुंचने पर हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। राजधानी में भारी पुलिस बल की तैनाती, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध और यातायात नियंत्रण के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर छिड़ी बहस
संजय राउत के बयान ने प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की शक्तियों को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है। विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और निर्धारित नियमों को प्रतिबंधों की वजह बताया है। अब इस पूरे मामले में राजनीतिक दलों, प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के रुख पर सबकी नजर बनी हुई है।


