बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, वह नवंबर या दिसंबर 2026 में नई दिल्ली का दौरा कर सकते हैं। खास बात यह है कि रहमान ने हाल ही में नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया था। अब प्रस्तावित द्विपक्षीय यात्रा के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दे एजेंडे में आ सकते हैं।
BRICS में नहीं पहुंचे थे तारिक रहमान
भारत ने तारिक रहमान को दो अलग-अलग मौकों पर आमंत्रित किया था। पहला निमंत्रण द्विपक्षीय यात्रा के लिए था, जबकि दूसरा BRICS के आउटरीच सत्र में शामिल होने के लिए, जहां उन्हें BIMSTEC के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर बुलाया गया था। हालांकि, रहमान 12-13 सितंबर को दिल्ली में हुए BRICS सम्मेलन में शामिल नहीं हुए। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बाद में स्पष्ट किया कि दोनों निमंत्रण अलग-अलग थे।
बांग्लादेश ने संकेत दिया है कि वह बहुपक्षीय मंच के बजाय सीधे द्विपक्षीय बातचीत के जरिए भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाना चाहता है। ऐसे में अगर नवंबर या दिसंबर में रहमान भारत आते हैं, तो यह उनकी पहली आधिकारिक द्विपक्षीय भारत यात्रा होगी।
क्या शेख हसीना का मुद्दा उठेगा?
भारत-बांग्लादेश संबंधों में सबसे संवेदनशील मुद्दों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत में रहना शामिल है। हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश छोड़कर भारत आई थीं। ढाका की ओर से उनके प्रत्यर्पण की मांग की जाती रही है, जबकि भारत ने इस मामले के कानूनी और न्यायिक पहलुओं की समीक्षा की बात कही है।
अगस्त में नई दिल्ली से हसीना की वर्चुअल मीडिया बातचीत के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया था। बांग्लादेश सरकार ने उनकी गतिविधियों पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद रहमान की भारत यात्रा को लेकर भी माहौल प्रभावित हुआ। बांग्लादेशी राजनयिक सूत्रों ने पहले कहा था कि यात्रा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि भारत हसीना के भारत की जमीन से राजनीतिक गतिविधियों को लेकर क्या रुख अपनाता है।
हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित यात्रा में रहमान औपचारिक रूप से हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाएंगे या नहीं। इसलिए इसे संभावित एजेंडे का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
गंगा जल संधि भी अहम मुद्दा
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल संधि भी महत्वपूर्ण विषय हो सकती है। 1996 में हुई यह 30 वर्षीय संधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है और दोनों देशों के बीच इसके भविष्य को लेकर बातचीत चल रही है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नदी से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त नदी आयोग के तहत तकनीकी स्तर पर बैठकें जारी हैं। इसके अलावा व्यापार, ऊर्जा, सीमा प्रबंधन और द्विपक्षीय विकास परियोजनाओं पर भी बातचीत हो सकती है।
फिलहाल भारत की ओर से रहमान की यात्रा की तारीख की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यात्रा को लेकर नई जानकारी मिलने पर उसे साझा किया जाएगा। ऐसे में नवंबर-दिसंबर की संभावित यात्रा भारत-बांग्लादेश संबंधों में आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण बातचीत का मंच बन सकती है।


