भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच अब कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की तैनाती में महत्वपूर्ण कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के दौरान उत्तरी सीमाओं के सामने चीन ने 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड आकार की सेनाएं तैनात की थीं। इसके साथ ही भारत-चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर हुई बातचीत से सीमा पर स्थिरता बढ़ने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
LAC पर चीन की तैनाती में बड़ी कमी
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2025 में उत्तरी सीमा पर PLA की तैनाती में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सेना ने LAC के सभी सेक्टरों में अपनी मजबूत तैनाती बनाए रखी और किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए तैयार रही। इन तैनातियों में संयुक्त हथियारों वाली ब्रिगेड शामिल हैं, जिनमें पैदल सेना के साथ टैंक, तोपखाना और एयर डिफेंस जैसी क्षमताएं होती हैं।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों ने सीमा पर बड़े पैमाने पर सैनिक और सैन्य उपकरण तैनात किए थे। इसके बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश हुई।
बातचीत का दिखा असर
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक तथा सैन्य स्तर पर लगातार बातचीत से सकारात्मक माहौल बनाने में मदद मिली। इसका असर सीमा पर स्थिरता के रूप में दिखाई दे रहा है।
हाल के दिनों में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच भी संपर्क बढ़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2026 के ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बातचीत की। दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति को संबंधों में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण बताया। हालांकि, सीमा विवाद का स्थायी समाधान अभी बाकी है और सैन्य तैनाती तथा कई रणनीतिक मुद्दे अब भी चुनौती बने हुए हैं।
कश्मीर में पत्थरबाजी पर भी बड़ा दावा
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति को भी ‘नियंत्रण में’ बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा हालात में सुधार हुआ है और हिंसक गतिविधियों पर सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत हुई है। इसी व्यापक बदलाव के बीच कश्मीर में पहले देखने को मिलने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं में भी भारी कमी आई है।
कश्मीर में पत्थरबाजी लंबे समय तक सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती रही थी। प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी की घटनाएं कई बार कानून-व्यवस्था और आतंकवाद विरोधी अभियानों में बाधा बनती थीं। अब ऐसी घटनाओं में कमी को घाटी के बदले सुरक्षा माहौल का संकेत माना जा रहा है।
भारत ने भी LAC पर तैयारी मजबूत रखी
चीन की तैनाती घटने के बावजूद भारत ने अपनी सैन्य तैयारी में किसी तरह की ढील नहीं दी है। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि LAC के सभी क्षेत्रों में भारतीय सेना की तैनाती मजबूत है और वह किसी भी उभरती चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।
इससे संकेत मिलता है कि भारत सीमा पर शांति और स्थिरता की कोशिशों के साथ-साथ अपनी सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत बनाए रखना चाहता है। ऐसे में चीन की सैन्य तैनाती में कमी और दोनों देशों के बीच बढ़ते संवाद को रिश्तों में संभावित नरमी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इसे सीमा विवाद का अंतिम समाधान मानना अभी जल्दबाजी होगी।


