देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। महाराष्ट्र से लेकर उत्तराखंड और पूर्वोत्तर तक भारी बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया है। मुंबई में बारिश के बाद एयरपोर्ट के आसपास जलभराव की स्थिति बन गई, जबकि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में तेज पानी के बहाव ने चीन सीमा से जुड़े इलाकों को जोड़ने वाला 170 मीटर लंबा बेली ब्रिज बहा दिया। इसके अलावा गुजरात, मिजोरम और बिहार में भी बारिश और बाढ़ से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
मुंबई एयरपोर्ट के आसपास भरा पानी
महाराष्ट्र में भारी बारिश के बाद मुंबई के कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई। छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के आसपास भी सड़कों पर पानी जमा हो गया। इससे यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग ने मुंबई और आसपास के इलाकों में बारिश को लेकर पहले ही चेतावनी जारी की थी।
गुजरात के भरूच में भी तेज बारिश का असर दिखाई दिया। यहां कासक अंडरपास में पानी भर गया, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। मौसम विभाग के अनुसार महाराष्ट्र के कई हिस्सों में आने वाले समय में भी भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।
चीन सीमा से जुड़े 35 गांवों का संपर्क कटा
उत्तराखंड में बारिश ने सबसे गंभीर असर पिथौरागढ़ जिले में डाला है। तवाघाट-गुंजी हाईवे पर कुलागाड़ में बना 170 मीटर लंबा बेली ब्रिज तेज बहाव में बह गया। यह पुल दारमा, व्यास और चौदास घाटियों को जोड़ता था। पुल टूटने के बाद इन तीनों घाटियों का संपर्क बाधित हो गया है। इससे चीन सीमा से जुड़े 35 गांवों की 30 हजार से अधिक आबादी प्रभावित हुई है। सीमा क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है।
खास बात यह है कि सीमा क्षेत्र में संपर्क बहाल करने के लिए सीमा सड़क संगठन यानी BRO ने यह पुल 4 सितंबर को ही तैयार किया था। लेकिन शुक्रवार रात हुई भारी बारिश के बाद कुलागाड़ में पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि नया पुल भी उसकी चपेट में आ गया। पुल बहकर काली नदी के रास्ते नेपाल सीमा की ओर चला गया।
हाईवे पर भी भूस्खलन का खतरा
पिथौरागढ़ में सिर्फ पुल टूटने की समस्या नहीं है। टनकपुर-पिथौरागढ़ हाईवे पर घाट बैंड के पास पहाड़ी से बोल्डर और पत्थर गिरने के कारण सड़क करीब 10 घंटे तक बंद रही। इस दौरान सैकड़ों यात्री, टैक्सी, बस और मालवाहक वाहन फंस गए। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के बीच भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है।
मिजोरम और बिहार में भी हालात गंभीर
बारिश का असर पूर्वोत्तर में भी देखने को मिला। मिजोरम में भारी बारिश के बाद भूस्खलन की घटना में 14 वर्षीय किशोर की मौत हो गई, जबकि चार लोग घायल बताए गए हैं। वहीं बिहार में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर है। राज्य के 15 जिलों में 48.22 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं और गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
आगे और बिगड़ सकते हैं हालात?
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कई राज्यों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। 12 से 14 सितंबर के दौरान उत्तराखंड में गरज-चमक के साथ भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। 13-14 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में भी भारी बारिश हो सकती है। इसके बाद 15 से 17 सितंबर के बीच जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बारिश का दौर बढ़ सकता है। 16-17 सितंबर को हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़क और पुल टूटने तथा अचानक बाढ़ का खतरा बना रह सकता है, जबकि मैदानी और शहरी इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका है।


