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    BRICS Summit : मोदी-जिनपिंग की मुलाकात, पुतिन से भी अहम बातचीत, नई दिल्ली घोषणा पत्र जारी

    राजधानी दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन शनिवार को कूटनीति, वैश्विक राजनीति और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई अहम घटनाक्रम देखने को मिले। भारत की मेजबानी में हो रहे सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात रही। इसके अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स देशों के नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की। दिन के अंत में नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।

    मोदी-जिनपिंग की 50 मिनट तक हुई बातचीत

    ब्रिक्स सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच करीब 50 मिनट तक बातचीत हुई। यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा है। हाल के समय में दोनों देशों ने रिश्तों को धीरे-धीरे सामान्य करने की दिशा में कदम उठाए हैं।

    बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों की आगे की प्रगति के लिए जरूरी है। दोनों नेताओं ने सीमा मुद्दे के साथ व्यापार, आर्थिक संबंधों, बाजार पहुंच और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर भी चर्चा की। चीन की ओर से दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग और दोनों देशों के साझा विकास पर जोर दिया गया।

    पुतिन के साथ भी मोदी की अहम बातचीत

    प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच रूस-यूक्रेन संघर्ष, द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक सहयोग समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन के दौरान मोदी और पुतिन के बीच अनौपचारिक गर्मजोशी भी दिखाई दी। दोनों नेताओं की साथ में कार यात्रा भी चर्चा में रही।

    न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन पर बनी सहमति

    पहले दिन का सबसे बड़ा संस्थागत परिणाम नई दिल्ली घोषणा रही। ब्रिक्स नेताओं ने इसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया। घोषणा में बहुपक्षवाद, वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और विकासशील देशों की भूमिका मजबूत करने पर जोर दिया गया। भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका समेत विस्तारित 11 सदस्यीय ब्रिक्स समूह ने वैश्विक संस्थाओं को मौजूदा विश्व व्यवस्था के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वकारी बनाने की जरूरत बताई।

    घोषणा में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत वैश्विक संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की अधिक भागीदारी का समर्थन किया गया। भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका की आकांक्षा को भी चीन और रूस ने समर्थन दिया।

    पश्चिम एशिया संकट और आतंकवाद पर चर्चा

    ब्रिक्स नेताओं ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई और अधिकतम संयम बरतने की अपील की। घोषणा में बातचीत, कूटनीति और बहुपक्षीय प्रयासों के जरिए विवादों का समाधान करने पर जोर दिया गया। गाजा और फिलिस्तीन के मुद्दे को लेकर भी समूह ने अपनी चिंता दर्ज कराई।

    आतंकवाद के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया गया। घोषणा में आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की गई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की जरूरत बताई गई।

    स्थानीय मुद्राओं और डिजिटल सहयोग पर जोर

    आर्थिक मोर्चे पर ब्रिक्स देशों ने सदस्य देशों की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने की बात कही। हालांकि, इस सम्मेलन में किसी साझा ब्रिक्स मुद्रा की घोषणा नहीं हुई। इसके बजाय सीमा पार भुगतान को आसान बनाने और सदस्य देशों की भुगतान प्रणालियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सार्वजनिक ढांचे, स्वास्थ्य, उद्योग और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

    गाला डिनर और सांस्कृतिक रंग

    दिन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत मंडपम में ब्रिक्स नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए गाला डिनर आयोजित किया। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और संगीत की झलक भी देखने को मिली। हालांकि, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गाला डिनर में शामिल नहीं हुए।

    ब्रिक्स नेताओं ने एकता और सतत विकास के प्रतीक के तौर पर बरगद के पौधे भी लगाए।

    इस तरह सम्मेलन का पहला दिन भारत-चीन रिश्तों में संभावित नरमी, रूस के साथ रणनीतिक संवाद, पश्चिम एशिया संकट पर साझा चिंता और वैश्विक शासन में ग्लोबल साउथ की बड़ी भूमिका जैसे मुद्दों के नाम रहा। दूसरे दिन इन विषयों पर आगे की चर्चा और सहयोग की दिशा तय होने की उम्मीद है।

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