लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर घमासान तेज हो गया है। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को एक बार फिर पार्टी से बाहर कर दिया है। मायावती ने गुरुवार को जारी अपने बयान में आकाश आनंद पर ‘डबल माइंड’ से काम करने का आरोप लगाया। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पार्टी में नेतृत्व और आकाश आनंद की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।
मायावती ने अपने बयान में आकाश आनंद को पार्टी की जिम्मेदारियों से पूरी तरह अलग करने की बात कही। इससे पहले भी आकाश आनंद को बसपा से हटाया जा चुका है, लेकिन बाद में उन्हें पार्टी में वापस लाया गया था। वर्ष 2023 में मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। हालांकि, इसके बाद दोनों के बीच राजनीतिक समीकरण कई बार बदलते रहे हैं।
अशोक सिद्धार्थ के संन्यास पर मायावती की प्रतिक्रिया
आकाश आनंद पर कार्रवाई से ठीक पहले उनके ससुर और बसपा के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया। मायावती ने उनके इस फैसले को ‘देर से उठाया गया, लेकिन सही कदम’ बताया। उन्होंने कहा कि अगर सिद्धार्थ ने पहले ही राजनीति से संन्यास ले लिया होता तो बसपा, बहुजन समाज और आंदोलन को कई मुश्किल परिस्थितियों से नहीं गुजरना पड़ता।
दरअसल, मायावती ने बुधवार को ही कहा था कि यदि अशोक सिद्धार्थ राजनीति से पूरी तरह अलग हो जाते हैं, तभी आकाश आनंद को पार्टी में स्वतंत्र रूप से काम करने और जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है। मायावती ने सिद्धार्थ पर पार्टी हितों की अनदेखी और अनुशासनहीनता के आरोप भी लगाए थे।
सिद्धार्थ बोले- मायावती के लिए जान भी दे सकता हूं
मायावती के बयान के बाद अशोक सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया पर राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उन्होंने बहुजन मिशन के हितों के खिलाफ कोई काम नहीं किया और आकाश आनंद को गुमराह करने के आरोप भी गलत हैं। उन्होंने मायावती के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए कहा कि पार्टी और बहुजन मिशन के लिए उनका त्याग छोटा है।
2027 से पहले बसपा के सामने बड़ी चुनौती
आकाश आनंद को लेकर मायावती का ताजा फैसला बसपा की चुनावी तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक है और पार्टी को संगठन को मजबूत करने की चुनौती है। ऐसे में नेतृत्व की दूसरी पीढ़ी को लेकर बार-बार सामने आ रहा विवाद बसपा की रणनीति और चुनावी अभियान पर असर डाल सकता है।
आकाश आनंद को युवा चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश पहले भी हुई थी, लेकिन उनके राजनीतिक सफर में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। अब एक बार फिर उन्हें पार्टी से बाहर किए जाने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि बसपा आगे किस नेतृत्व मॉडल के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी।


