इस साल दिवाली पर मिठास का स्वाद थोड़ा महंगा पड़ सकता है। चीनी की बढ़ती कीमतों ने चॉकलेट, मिठाई, कुकीज और दूसरे शुगर-आधारित प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ा दी है। ऐसे में कई FMCG कंपनियां आने वाले त्योहारी सीजन से पहले कीमतों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही हैं। इसका सीधा असर दिवाली पर दिए जाने वाले मिठाई और चॉकलेट के गिफ्ट पैक पर भी पड़ सकता है।
चीनी की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
चीनी की कीमतों में हाल के महीनों में तेज उछाल आया है। सरकार के मुताबिक 20 जुलाई 2026 को चीनी की औसत कीमत करीब 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी। सरकार ने इसके पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारी मांग में बढ़ोतरी, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक आपूर्ति में कमी और कुछ जगहों पर जमाखोरी-सट्टेबाजी को प्रमुख कारण बताया है।
हालांकि, हाल में सरकारी कदमों के बाद चीनी की कीमतों में कुछ नरमी भी आई है। इसके बावजूद कंपनियों के लिए लागत का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीनी की कीमतें हाल के महीनों की तुलना में अब भी करीब 20 फीसदी ज्यादा हैं। यही वजह है कि कंपनियां अपनी लागत और मुनाफे के बीच संतुलन बनाने के लिए कीमतों में बदलाव पर विचार कर रही हैं।
चॉकलेट और कुकीज भी होंगी प्रभावित
चीनी केवल मिठाई बनाने में ही इस्तेमाल नहीं होती। चॉकलेट, बिस्कुट, कुकीज, केक, आइसक्रीम और कई दूसरे पैकेज्ड फूड उत्पादों में भी इसकी बड़ी भूमिका होती है। इसलिए चीनी महंगी होने का असर पूरे कंज्यूमर गुड्स सेक्टर पर पड़ सकता है।
कंपनियां आम तौर पर बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ तुरंत ग्राहकों पर नहीं डालतीं। पहले वे पैकेजिंग, प्रमोशन और दूसरी लागतों में बचत की कोशिश करती हैं। लेकिन अगर कच्चे माल की कीमत लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है तो उत्पादों की कीमत बढ़ाना या पैक का आकार घटाना जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
मिठाई पर भी बढ़ सकता है खर्च
दिवाली के दौरान मिठाई की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में चीनी की कीमतों के साथ दूध और दूसरे कच्चे माल की लागत बढ़ने से मिठाई की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। पुणे में हाल की रिपोर्टों में मिठाई कारोबारियों ने बढ़ी हुई लागत के कारण कीमतों में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी की बात कही है।
कुछ कंपनियों ने कीमत बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू भी कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, बिकाजी फूड्स ने अपने मिठाई पोर्टफोलियो में करीब 2 फीसदी की कीमत बढ़ोतरी लागू करना शुरू किया है। अन्य कंपनियां भी बाजार की स्थिति देखकर आगे फैसला ले सकती हैं।
सरकार के कदमों से कितनी राहत?
त्योहारी सीजन में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने का फैसला किया है। इसके अलावा जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट और स्टॉक की जांच जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
सरकार का अनुमान है कि अक्टूबर से नई पेराई शुरू होने के बाद बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर होगी। इससे त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
ग्राहकों की जेब पर असर
अगर चीनी की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो दिवाली की खरीदारी में ग्राहकों को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है। एक तरफ मिठाई और गिफ्ट पैक महंगे हो सकते हैं, वहीं चॉकलेट और कुकीज जैसे रोजमर्रा के पैकेज्ड उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।
हालांकि, कीमतों में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले हफ्तों में चीनी की कीमतें किस दिशा में जाती हैं और कंपनियां बढ़ी लागत का कितना हिस्सा ग्राहकों पर डालती हैं। फिलहाल इतना साफ है कि इस दिवाली मिठास खरीदने के लिए पिछले साल के मुकाबले ज्यादा बजट रखना पड़ सकता है।


