महज 15 साल की उम्र में भारतीय क्रिकेट में तहलका मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी अब बीसीसीआई की खास निगरानी में हैं। बोर्ड सिर्फ उनकी मौजूदा फॉर्म पर नहीं, बल्कि उनके लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर को तैयार करने पर ध्यान दे रहा है। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने साफ कहा है कि बोर्ड चाहता है कि वैभव सिर्फ एक-दो सीरीज के स्टार बनकर न रह जाएं, बल्कि सचिन तेंदुलकर की तरह लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट की सेवा करें।
सचिन जैसा लंबा करियर बनाने की तैयारी
वैभव ने बेहद कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखकर सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड पीछे छोड़ा। इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू करते समय वह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले सबसे युवा पुरुष खिलाड़ी बने।
इसके बाद इंग्लैंड दौरे पर शुरुआती मुश्किलों के बावजूद वैभव ने जिम्बाब्वे के खिलाफ जोरदार वापसी की। उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय में महज 15 साल और 118 दिन की उम्र में अर्धशतक लगाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह पारी उन्होंने सिर्फ 18 गेंदों में पूरी की थी।
बीसीसीआई अब इसी प्रतिभा को लंबे करियर में बदलना चाहता है। बोर्ड का मानना है कि इतनी कम उम्र में मिली शोहरत खिलाड़ी पर अतिरिक्त दबाव भी डाल सकती है। इसलिए वैभव को जल्दबाजी में लगातार बड़े असाइनमेंट देने के बजाय उनके विकास, फिटनेस, मानसिक मजबूती और स्किल डेवलपमेंट पर नजर रखी जा रही है। बोर्ड ने वैभव के साथ करीब 10-15 उभरते खिलाड़ियों को भी विशेष टारगेट ग्रुप में रखा है। इनके प्रशिक्षण और विकास की निगरानी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के स्तर पर की जा रही है।
अब निशाने पर टी20 शतक का वर्ल्ड रिकॉर्ड
वैभव के सामने अगली बड़ी चुनौती अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज है, जो 13 सितंबर से शुरू होनी है। इस सीरीज में उनके पास ऐसा रिकॉर्ड बनाने का मौका है, जिसकी कुछ दिन पहले तक कल्पना भी मुश्किल थी।
दक्षिण अफ्रीका के युवा बल्लेबाज लुआन ड्रे प्रीटोरियस ने हाल ही में नामीबिया के खिलाफ 53 गेंदों पर 101 रन बनाकर टी20 अंतरराष्ट्रीय में शतक जड़ा। वह किसी फुल-मेम्बर टीम के लिए इस प्रारूप में शतक लगाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बने। उन्होंने 20 साल और 161 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की और हजरतुल्लाह जजई का रिकॉर्ड तोड़ा।
अब वैभव के पास प्रीटोरियस का यह रिकॉर्ड तोड़ने का सुनहरा मौका है। वह अभी सिर्फ 15 साल के हैं। अगर अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में वैभव शतक लगा देते हैं, तो वह इस रिकॉर्ड को बड़े अंतर से अपने नाम कर सकते हैं।
नजर सिर्फ रिकॉर्ड पर नहीं, भविष्य पर
हालांकि वैभव के लिए सबसे बड़ी चुनौती रिकॉर्ड से ज्यादा निरंतरता होगी। बीसीसीआई का पूरा फोकस यही है कि शुरुआती सफलता के बाद उन पर अपेक्षाओं का बोझ हावी न हो। जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार प्रदर्शन और घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने के बाद अब अफगानिस्तान सीरीज उनके विकास का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगी।
अगर वैभव इस दौर में भी प्रभाव छोड़ते हैं, तो उनके नाम के साथ रिकॉर्ड जुड़ने का सिलसिला जारी रह सकता है। लेकिन बीसीसीआई की असली कोशिश उन्हें रिकॉर्ड तोड़ने वाला खिलाड़ी नहीं, बल्कि लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट का बड़ा सितारा बनाने की है।


