पंजाब की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम पंजाब (मोहाली) की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में ‘शिफ्टेड’ (स्थानांतरित) श्रेणी में डालकर हटा दिया गया है। इस पर उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना का आरोप लगाया है।
राघव चड्ढा के मुख्य आरोप
- बदले की राजनीति: आम आदमी पार्टी से बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा ने कहा कि पंजाब सरकार SIR प्रक्रिया में अधिकारियों के ज़रिए पक्षपात और राजनीतिक बदला निकाल रही है।
- EC guidelines का उल्लंघन: चड्ढा ने चुनाव आयोग के SIR दिशानिर्देशों के पैराग्राफ 4(d) का हवाला देते हुए कहा कि जन प्रतिनिधियों (सांसदों, विधायकों और न्यायाधीशों) के लिए ‘संरक्षित सूची’ (Protected List) का प्रावधान होता है। यदि नाम पर कोई संशय था, तो भी ड्राफ्ट रोल में उनका नाम रखा जाना अनिवार्य था, जिसे जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।
- दावे और आपत्तियां प्रक्रिया: उन्होंने राहत जताते हुए कहा कि यह सिर्फ ‘ड्राफ्ट’ लिस्ट है। 12 सितंबर 2026 तक चलने वाली ‘दावे और आपत्तियां’ (Claims & Objections) प्रक्रिया के दौरान वे इस गलती को दुरुस्त कराएंगे।
आम आदमी पार्टी (AAP) का पलटवार
AAP और पंजाब सरकार के प्रवक्ताओं ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है:
- चुनाव आयोग का अधिकार: आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा संचालित की जाती है, इसमें राज्य सरकार या AAP का नाम हटाने या जोड़ने में कोई हस्तक्षेप नहीं होता।
- बैकडेटेड रजिस्ट्रेशन का आरोप: AAP का दावा है कि राघव चड्ढा लंबे समय से दिल्ली में रह रहे हैं और वे दिल्ली के राजेंद्र नगर से ‘बैकडेटेड’ (पिछली तारीख से) प्रक्रिया अपनाकर अपना वोट बनवाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि वे पंजाब में नहीं रह रहे हैं, तो अपने वोटर रजिस्ट्रेशन को मेंटेन रखना या शिफ्ट कराना उनकी खुद की जिम्मेदारी थी।
पंजाब में SIR प्रक्रिया के तहत लगभग 20.66 लाख नामों को विभिन्न कारणों (जैसे शिफ्ट होना, मृत्यु, डुप्लीकेट) से ड्राफ्ट रोल से हटाया गया है। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित की जाएगी।


