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    जी20 के बीच भारत-अमेरिका की बड़ी पहल, दिल्ली में BRICS समिट पर दुनिया की नजर

    भारत की कूटनीति के लिहाज से सितंबर का महीना बेहद अहम रहने वाला है। एक तरफ जी20 बैठक के दौरान भारत और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन के क्षेत्र में सहयोग और मजबूत करने पर जोर दिया है, तो दूसरी तरफ नई दिल्ली में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीति का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। दोनों घटनाक्रम ऐसे समय हो रहे हैं, जब दुनिया व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रणनीतिक संसाधनों को लेकर बड़े बदलावों से गुजर रही है।

    क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत-अमेरिका साथ

    जी20 बैठक से इतर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के बीच हुई बातचीत में दोनों देशों ने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के साथ क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों ने आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक सुरक्षित, विविध और लचीला बनाने पर जोर दिया।

    क्रिटिकल मिनरल्स में लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और दुर्लभ पृथ्वी तत्व जैसे संसाधन शामिल हैं, जिनकी जरूरत इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण और आधुनिक ऊर्जा तकनीकों में तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में इन खनिजों की आपूर्ति पर किसी एक देश या क्षेत्र की अत्यधिक निर्भरता रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकती है।

    भारत और अमेरिका पहले ही मई 2026 में क्रिटिकल मिनरल्स सहयोग के लिए एक रणनीतिक ढांचे पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। इसका उद्देश्य खनन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और वित्तपोषण समेत पूरी सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाना है।

    भारत के लिए क्यों अहम है यह साझेदारी?

    भारत तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, अक्षय ऊर्जा, बैटरी निर्माण और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार कर रहा है। ऐसे में जरूरी खनिजों की लगातार और भरोसेमंद उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका के साथ सहयोग भारत को वैकल्पिक स्रोत विकसित करने, तकनीकी क्षमता बढ़ाने और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करने में मदद कर सकता है।

    दिल्ली में BRICS का बड़ा जमावड़ा

    इसी बीच भारत 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के भी सम्मेलन में शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है।

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी दिल्ली पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। दोनों नेताओं की संभावित मौजूदगी सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना रही है।

    भारत के लिए BRICS सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संगठन का विस्तार होने के बाद इसका आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव बढ़ा है। व्यापार, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था, विकास, ऊर्जा, तकनीक और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच चर्चा होने की उम्मीद है।

    दिल्ली में सुरक्षा और तैयारियां तेज

    BRICS सम्मेलन को लेकर राजधानी में तैयारियां तेज हो गई हैं। बुधवार को मोटरकेड रिहर्सल के कारण दिल्ली की 35 से अधिक प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन लागू किए गए। सम्मेलन 11 से 13 सितंबर के बीच भारत मंडपम में प्रस्तावित है।

    कुल मिलाकर, एक ओर अमेरिका के साथ रणनीतिक खनिजों की साझेदारी भारत की आर्थिक और तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है, वहीं BRICS सम्मेलन भारत को वैश्विक दक्षिण और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच अपनी कूटनीतिक भूमिका मजबूत करने का बड़ा मंच देगा। आने वाले दिनों में दिल्ली से होने वाली उच्चस्तरीय मुलाकातों और फैसलों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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