इस साल देश में मानसून का मिजाज काफी बदला हुआ और असमान नजर आ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, जून से 31 अगस्त के बीच कुल बारिश में लगभग 14% की कमी (घाटा) दर्ज की गई है। खासतौर पर अगस्त महीने में देशभर में सामान्य से करीब 16% कम बारिश हुई।
हालांकि, यह औसत आंकड़ा जमीन पर मौजूद असल संकट की पूरी कहानी बयां नहीं करता। बारिश भले ही कुल मिलाकर कम हुई हो, लेकिन जहां भी पानी बरसा, वहां बेहद कम समय में हुई मूसलाधार बारिश ने आफत खड़ी कर दी।
जून से अगस्त तक कैसा रहा हाल?
- कम दिनों में अत्यधिक बारिश: जून से अगस्त के दौरान कई राज्यों में पूरे महीने का कोटा महज दो से तीन दिनों में पूरा हो गया। इस ‘क्लाउडबर्स्ट जैसी’ या अत्यधिक तेज बारिश के कारण शहरों में भयंकर जलभराव, नदियों का उफान और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हुई।
- अगस्त के बड़े स्पेल: 18 अगस्त को उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 21 सेमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जबकि छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और यूपी में 12 से 20 सेमी बारिश हुई। 25 अगस्त को ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में 20 सेमी तक तेज बारिश हुई।
- नदियों का रौद्र रूप: अगस्त के आखिरी हफ्ते में भारी बारिश के चलते मध्य प्रदेश में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से करीब 6 मीटर ऊपर तक पहुंच गई।
- पहाड़ों पर भूस्खलन और तबाही: हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे दर्जनों सड़कें बंद हुईं और जान-माल का भारी नुकसान हुआ।
क्षेत्रीय असमानता और आगे का पूर्वानुमान
एक तरफ जहां राजस्थान, मध्य प्रदेश, यूपी, बिहार और ओडिशा के कुछ इलाकों में छिटपुट स्पेल में भारी से अत्यधिक भारी बारिश ने जलभराव का संकट खड़ा किया, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में सूखा और कम बारिश देखने को मिली है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि सितंबर की शुरुआत में पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां सक्रिय रहेंगी और भारी बारिश हो सकती है, जबकि दक्षिण भारत में अगले कुछ दिनों तक बारिश की रफ्तार धीमी ही बनी रहेगी।


