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    क्या ‘KGF’ जैसी मजबूत है ‘टॉक्सिक’? जानें कैसी है यश की फिल्म की कहानी

    केजीएफ (KGF) फ्रैंचाइजी की अपार सफलता के चार साल बाद कन्नड़ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। निर्देशक गीतू मोहनदास द्वारा निर्देशित यह फिल्म जबरदस्त हाइप के बावजूद दर्शकों और समीक्षकों की उम्मीदों पर खरी उतरती नजर नहीं आ रही है।

    एक्शन की चमक, कहानी में दम नहीं

    फिल्म का मुख्य आकर्षण केवल इसका तकनीकी पक्ष और यश का स्वैग है:

    • एक्शन और वीएफएक्स (VFX): फिल्म के एक्शन सीन्स, सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं। डार्क और स्टाइलैस्ड बैकड्रॉप में फिल्माए गए सीन्स आपको तकनीकी रूप से प्रभावित करते हैं।
    • यश का लुक और स्क्रीन प्रेजेंस: चार साल के लंबे इंतजार के बाद पर्दे पर लौटे यश का स्क्रीन प्रेजेंस शानदार है। उनका एक्शन अवतार और एटीट्यूड फैंस को खूब पसंद आता है।

    कहानी का सार

    • फिल्म की कहानी राया (यश) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक खूंखार और बेरहम माफिया वर्ल्ड में अपनी धाक जमाता है। वह बचपन से ही हिंसा और अपराध के बीच पला-बढ़ा है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे राया अंडरवर्ल्ड के वैश्विक सिंडिकेट, ड्रग कार्टेल और शक्तिशाली दुश्मनों को चुनौती देकर अपने साम्राज्य का विस्तार करता है। ‘फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ की थीम के तहत कहानी में विश्वासघात, निजी नुकसान और प्यार का भावनात्मक एंगल पिरोने की कोशिश की गई है, जहां राया के सामने अपने करीबियों की रक्षा करने की चुनौती आती है।

    कहानी की कमजोरी

    फिल्म का एक्शन और वीएफएक्स (VFX) बेहद शानदार है, लेकिन कहानी की गति (Pacing) काफी धीमी है। सेकंड हाफ में पटकथा बिखरी हुई लगती है और इतनी जटिल हो जाती है कि दर्शक भावनात्मक रूप से किरदारों से जुड़ नहीं पाते। कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया जैसे बड़े कलाकारों के किरदारों को भी सीमित स्पेस मिला है।

    कहां ‘टॉक्सिक’ हुई फिल्म?

    फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कमजोर और बिखरी हुई पटकथा है:

    1. धीमी और उबाऊ कहानी: निर्देशक गीतू मोहनदास ने फिल्म को एक ‘एडल्ट फेयरी टेल’ के रूप में पेश करने की कोशिश की है, लेकिन सेकंड हाफ में कहानी इतनी धीमी और दिशाहीन हो जाती है कि यह दर्शकों के लिए टॉर्चर बन जाती है।
    2. सपोर्टिंग कास्ट का कम इस्तेमाल: फिल्म में कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसी बड़ी अभिनेत्रियां होने के बावजूद, किसी भी किरदार को ठीक से विकसित नहीं किया गया है।
    3. भावनाओं की कमी: एक्शन और हिंसा के बीच फिल्म की भावनात्मक गहराई गायब दिखती है, जिससे दर्शक मुख्य किरदार की यात्रा से जुड़ नहीं पाते।

    क्विक रिव्यू टेबल

    पहलूरेटिंग / समीक्षा
    निर्देशनकमजोर और भ्रमित करने वाली पटकथा
    मुख्य अभिनय (यश)दमदार स्वैग और एक्शन
    तकनीकी पक्षबेहतरीन सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड म्यूजिक
    ओवरऑल वर्डिक्टसिर्फ यश के फैंस और एक्शन प्रेमियों के लिए एक बार देखने लायक

    यदि आप केवल यश के स्टंट्स और विजुअल ट्रीट देखना चाहते हैं, तो ‘टॉक्सिक’ सिनेमाघरों में एक बार देखी जा सकती है; लेकिन यदि आप ‘KGF’ जैसी मजबूत कहानी की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म निराश करती है।

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