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    यशस्वी और वैभव को मिले सख्त सजा, संजय मांजरेकर ने ICC और BCCI के ढीले रवैये पर ऐतराज जताया

    भारत और श्रीलंका के बीच मैदान पर हुई तीखी झड़पों के बाद पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के ढीले रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया है। मांजरेकर ने युवा भारतीय बल्लेबाजों यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी का नाम लेते हुए दोनों नियामक संस्थाओं से मैदान पर अभद्र व्यवहार और ‘शारीरिक संपर्क’ (Physical Contact) के मामलों में सख्त से सख्त सजा देने की मांग की है।

    क्या है पूरा विवाद?

    1. यशस्वी जायसवाल बनाम असिता फर्नांडो:
      • भारत और श्रीलंका के बीच दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में आउट होने के बाद यशस्वी जायसवाल और तेज गेंदबाज असिता फर्नांडो के बीच बहस हो गई।बात इतनी बढ़ी कि यशस्वी ने वापस मुड़कर अपना हेलमेट पहने हुए सिर फर्नांडो के सिर से टकराया। ICC ने कोड ऑफ कंडक्ट (Article 2.12 – अनुचित शारीरिक संपर्क) का उल्लंघन मानने के बावजूद दोनों खिलाड़ियों पर केवल 25% मैच फीस का जुर्माना लगाया और 1 डिमेरिट प्वाइंट दिया।
    2. वैभव सूर्यवंशी बनाम विशेन हलाम्बागे:
      • इससे पहले इंडिया ‘ए’ और श्रीलंका ‘ए’ के बीच डंबुला में खेले गए मैच के दौरान 15 वर्षीय युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी की श्रीलंकाई खिलाड़ी विशेन हलाम्बागे के साथ धक्का-मुक्की हुई थी। इस मामले में भी कड़ी कार्रवाई के बजाय मामूली जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया था।

    मांजरेकर ने क्यों उठाई सख्त सजा की मांग?

    संजय मांजरेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर ICC और BCCI को टैग करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की: “प्रिय @icc और @bcci… हाल ही में इंडिया ‘ए’ के लिए वैभव और अब जायसवाल… अगर आप उन्हें इस तरह के व्यवहार के बाद मामूली सजा देकर छोड़ते रहेंगे, तो आप उन्हें ऐसा ही व्यवहार दोहराने के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं। यह खेल के लिए और विशेष रूप से उनके अपने भविष्य के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है।”

    विवाद का मुख्य बिंदु

    पहलूविवरण
    नियम उल्लंघनICC कोड ऑफ कंडक्ट का Article 2.12 (खिलाड़ी या अंपायर से अनुचित बॉडी कांटेक्ट)
    मांजरेकर का तर्कमामूली जुर्माना (25-50% फीस कटौती) खिलाड़ियों के व्यवहार में सुधार नहीं लाता, बल्कि उन्हें आगे भी आक्रामक रहने को बढ़ावा देता है।
    चिंता का विषययुवा और उभरते खिलाड़ियों में ऑन-फील्ड डिसिप्लिन और खेल भावना (Spirit of Cricket) की कमी।
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