देश में चीनी की बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे लोगों की रसोई और रोजमर्रा की खपत पर दिखाई देने लगा है। त्योहारों के मौसम से पहले चीनी महंगी होने पर कई उपभोक्ताओं ने इसका इस्तेमाल कम कर दिया है। LocalCircles के एक सर्वे में लोगों ने बताया कि कीमत बढ़ने के बाद वे चीनी की खरीद और खपत दोनों पर पहले से ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई 2026 को देशभर में चीनी की औसत कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी। एक महीने के भीतर 20 अगस्त तक यह बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। यानी कम समय में कीमत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। बढ़ते दामों ने आम परिवारों के बजट पर असर डाला है, खासकर ऐसे समय में जब त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ती है।
रोज कितनी चीनी खाते हैं लोग?
सर्वे में लोगों से उनकी दैनिक चीनी खपत के बारे में भी पूछा गया। नतीजों से पता चला कि बड़ी संख्या में लोग सीमित मात्रा में चीनी का इस्तेमाल करते हैं।
सर्वे के अनुसार:
- 28% लोग रोज करीब 10 ग्राम चीनी इस्तेमाल करते हैं।
- 25% लोगों की खपत 10 से 25 ग्राम के बीच है।
- 14% लोग 25 से 50 ग्राम तक चीनी लेते हैं।
- 9% लोग रोज 50 से 100 ग्राम चीनी इस्तेमाल करते हैं।
- 5% लोगों की खपत 100 ग्राम से ज्यादा है।
- 19% लोगों ने कहा कि वे बिल्कुल चीनी का सेवन नहीं करते।
महंगी हुई तो लोगों ने क्या बदला?
कीमत बढ़ने के बाद उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया भी दिलचस्प रही। सर्वे में 48% लोगों ने कहा कि वे पहले की तरह ही चीनी खरीद रहे हैं और उनकी खपत में कोई बदलाव नहीं आया है। हालांकि, 22% लोगों ने कीमत बढ़ने के कारण खरीद की मात्रा कम कर दी।
इसके अलावा 22% उपभोक्ताओं ने बताया कि वे पहले जितनी ही चीनी इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अब इसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं 4% लोगों ने महंगी चीनी के कारण मीठी चीजों की खरीदारी कम कर दी। अन्य 4% लोगों ने चीनी के विकल्प तलाशने शुरू कर दिए।
सरकार भी बढ़ती कीमतों से चिंतित
चीनी की महंगाई को देखते हुए सरकार ने बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। 30 सितंबर तक चीनी के निर्यात पर रोक लगाई गई है, जबकि 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी गई है। सरकार का उद्देश्य त्योहारों से पहले बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है।
कुल मिलाकर सर्वे बताता है कि महंगाई ने लोगों की पसंद और खरीदारी की आदतों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। चीनी जैसी रोजमर्रा की वस्तु के मामले में भी उपभोक्ता अब मात्रा घटाने, विकल्प अपनाने या अतिरिक्त खर्च सहने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।


