देश में त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले चीनी की कीमतों में अचानक बड़ा उछाल देखा जा रहा है। फुटकर बाजारों में चीनी के दाम ₹55 से ₹65 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार भी हरकत में आ गई है।
चीनी की कीमतें बढ़ने के मुख्य कारण
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, चीनी के दामों में उछाल के पीछे कई कारण हैं:
- उत्पादन में गिरावट और फसल को नुकसान: गन्ने की फसल को रेड रॉट (Red Rot) बीमारी, टॉप बोरर कीट और अनियमित बारिश-जलजमाव से काफी नुकसान हुआ है। इस कारण चीनी का उत्पादन अनुमानित 343 लाख मीट्रिक टन से घटकर लगभग 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है।
- त्याहारी मांग में बढ़ोतरी: अगस्त से नवंबर के दौरान रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण मिठाइयों, सॉफ्ट ड्रिंक्स और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में चीनी की मांग चरम पर पहुंच जाती है।
- जमाखोरी और सट्टेबाजी: सरकार के अनुसार, बाजार में कृत्रिम किल्लत पैदा करने के लिए कुछ व्यापारियों और मिलों द्वारा चीनी की सट्टेबाजी और जमाखोरी (Hoarding) की जा रही है।
- वैश्विक आपूर्ति में तंगी: ब्राजील जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में मौसम की खराबी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की कीमतें बढ़ी हैं।
इथेनॉल से जुड़ाव का दावा सरकार ने नकारा
बाजार में यह चर्चा थी कि पेट्रोल में मिलाने के लिए चीनी को इथेनॉल बनाने में डायवर्ट किया जा रहा है, जिससे कमी आई है। हालांकि सरकार ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए साफ किया कि इथेनॉल के लिए अब चीनी के बजाय मुख्य रूप से मक्के (Corn) का इस्तेमाल हो रहा है।
आपकी जेब पर क्या होगा असर?
- रसोई का बजट: रोजमर्रा की चाय, दूध और घरेलू इस्तेमाल के लिए चीनी खरीदने पर आम परिवारों को अधिक खर्च करना पड़ेगा।
- महंगी होंगी मिठाइयां और स्नैक्स: त्योहारी सीजन में मिठाइयों, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक्स, बेकरी प्रोडक्ट्स और पैकेज्ड फूड्स के दाम बढ़ सकते हैं।
सरकार का बड़ा एक्शन और राहत के उपाय
कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं:
- 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात: लगभग एक दशक बाद भारत ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) को बिना किसी आयात शुल्क (Duty-Free) के मंगवाने की मंजूरी दी है।
- स्टॉक लिमिट (भंडारण सीमा): डीलरों के लिए चीनी रखने की सीमा 400 टन तय की गई है। साथ ही, थोक उपभोक्ताओं (जैसे मिठाई निर्माताओं) के लिए 1 सितंबर से केवल 15 दिनों की जरूरत के बराबर ही स्टॉक रखने की अनुमति होगी।
- भौतिक सत्यापन: जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र और राज्यों की संयुक्त टीमें मिलों के स्टॉक की जांच कर रही हैं।


