देशभर में आगामी त्योहारों के सीजन से ठीक पहले रसोई का बजट गड़बड़ाने लगा है। उत्तर प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों के खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में अचानक जोरदार तेजी देखी जा रही है। बीते कुछ ही हफ़्तों के भीतर चीनी के भाव उछलकर ₹65 प्रति किलोग्राम तक पहुँच चुके हैं।
दामों में अचानक उछाल की मुख्य वजहें
- एथेनॉल और निर्यात का कोटा: एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के रस और सीरे का अत्यधिक इस्तेमाल होने तथा निर्यात प्रतिबद्धताओं के कारण घरेलू बाजार में सप्लाई और मांग का संतुलन प्रभावित हुआ है।
- सट्टेबाजी और जमाखोरी: त्योहारी मांग को देखते हुए थोक मंडी में सट्टेबाजी और बड़े व्यापारियों द्वारा कृत्रिम किल्लत पैदा करने की कोशिशों के कारण कीमतें तेजी से चढ़ी हैं।
- मिलों द्वारा स्टॉक में देरी: चीनी मिलें बिक्री तो दर्ज कर लेती थीं, लेकिन बाजार में भौतिक रूप से स्टॉक की आपूर्ति देर से करती थीं, जिससे बाजार में तात्कालिक किल्लत उत्पन्न हो रही थी।
सरकार ने क्या बदले नियम?
कीमतों पर अंकुश लगाने और कालाबाजारी रोकने के लिए केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने सख्त नए नियम लागू किए हैं:
- मिलों के लिए 7 दिनों की बाध्यता: सरकार ने सभी चीनी मिलों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे बिक्री के 7 दिनों के भीतर चीनी का स्टॉक बाजार में भेजें। यह व्यवस्था 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी ताकि आपूर्ति बाधित न हो।
- स्टॉक लिमिट में सख्ती: कारोबारियों और होलसेल डीलरों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा निर्धारित कर दी गई है। व्यापारी अब एक निश्चित सीमा से अधिक दिनों का स्टॉक नहीं रख पाएंगे।
- साप्ताहिक रिपोर्टिंग अनिवार्य: सभी शक्कर व्यापारियों और डीलरों को हर हफ्ते सरकारी पोर्टल पर अपने पास मौजूद कुल स्टॉक का ब्योरा देना अनिवार्य कर दिया गया है।
- आयात शुल्क में छूट पर विचार: घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार चीनी पर लगने वाली 100% इंपोर्ट ड्यूटी में राहत या छूट देने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार कर रही है।


