हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में अखिल भारतीय सेवाओं—भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और भारतीय वन सेवा (IFS)—के स्वीकृत पदों (कैडर स्ट्रेंथ) में भारी कटौती करने का एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने इस संबंध में कैडर पुनरीक्षण के लिए केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को औपचारिक पत्र भेज दिया है।
कैडर में कटौती का प्रस्तावित खाका
राज्य सरकार के इस कदम के तहत तीनों प्रमुख अखिल भारतीय सेवाओं के पदों को पुनर्गठित और सीमित किया जाएगा:
- आईएएस (IAS) कैडर: राज्य में आईएएस अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या 153 से घटाकर 130 करने का प्रस्ताव है।
- आईएफएस (IFS) कैडर: भारतीय वन सेवा अधिकारियों के स्वीकृत कैडर को 118 से घटाकर 83 किया जाएगा।
- आईपीएस (IPS) कैडर: पुलिस सेवा के स्वीकृत कैडर (वर्तमान में 96) में भी कटौती का प्रस्ताव शामिल किया गया है।
सालाना 200 करोड़ रुपये की होगी बचत
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस बड़े निर्णय के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश को अधिकारियों की बहुत बड़ी फौज की आवश्यकता नहीं है, बल्कि योजनाओं को जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने वाली जवाबदेह व्यवस्था चाहिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, कैडर में इस कटौती से राज्य के खजाने को सालाना करीब 200 करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी। इस बचाई गई धनराशि को प्रदेश के ढांचागत विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं में उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य का दैनिक प्रशासनिक कामकाज 100 से 110 आईएएस अधिकारियों के साथ सुचारू रूप से संचालित हो सकता है।
अन्य प्रशासनिक सुधार और संसाधन कटौती
प्रशासनिक स्तर पर फिजूलखर्ची रोकने और वित्तीय दक्षता बढ़ाने के लिए सरकार अन्य कड़े कदम भी उठा रही है:
- वाहनों के काफिले में कटौती: प्रशासनिक और फील्ड अधिकारियों को दी जाने वाली सरकारी गाड़ियों की संख्या में कमी की जा रही है। उदाहरण के लिए, फील्ड अधिकारियों के वाहनों का कोटा 56 से घटाकर 30 करने का फैसला लिया गया है।
- डेपुटेशन/प्रतिनियुक्ति प्रक्रिया: केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों की फाइलों को तेजी से मंजूरी दी जा रही है ताकि अनावश्यक प्रशासनिक बोझ कम हो सके।
फैसले का मुख्य उद्देश्य
राज्य सरकार का मानना है कि प्रशासनिक ढांचे को चुस्त-दुरुस्त और छोटा (lean & efficient) करने से न केवल वित्तीय संसाधनों की बचत होगी, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और लालफीताशाही पर लगाम लगेगी। केंद्र सरकार से औपचारिक मंजूरी मिलते ही इस नए कैडर ढांचे को लागू कर दिया जाएगा।


