कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने पार्टी की युवा रणनीति और छात्रों के बीच पहुंच को लेकर बड़ा आत्ममंथन किया है। राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ (Chhatron Ki Goonj) अभियान को युवाओं से अपेक्षित जनसमर्थन न मिलने पर थरूर ने कहा कि कांग्रेस को खुद से सवाल पूछना चाहिए कि पार्टी युवाओं और खासकर ‘जेन जी’ (Gen Z) की नब्ज पकड़ने में कहां चूक गई।
शशि थरूर का बड़ा बयान और आत्ममंथन
‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (IIMUN) की 15वीं सालगिरह के अवसर पर दिए एक साक्षात्कार में जब थरूर से पूछा गया कि राहुल गांधी के अभियान को वह प्रतिक्रिया क्यों नहीं मिली, जो जंतर-मंतर पर हुए हालिया छात्र आंदोलनों को मिली, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया:
- ‘कहां चूके, खुद से पूछना होगा’: थरूर ने माना, “यह सही बात है। इसीलिए हमें खुद से यह पूछने की जरूरत है कि हम क्या करने में विफल रहे? क्या हम छात्रों को सुनने में नाकाम रहे? या फिर राजनीति में जनता की नब्ज टटोलने की पुरानी कहावत को अपनाने में हम पीछे रह गए?”
- Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाना: उन्होंने सबसे अहम सवाल उठाया, “क्या हम ‘जेन जी’ (Gen Z) पीढ़ी की नब्ज को समझने में नाकाम रहे?” थरूर ने कहा कि 2029 के चुनावों में जेन जी सबसे बड़ा वोटिंग ग्रुप होगा और राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि यह युवा पीढ़ी वास्तविक बदलाव चाहती है, केवल पुराने ढर्रे पर राजनीति नहीं चल सकती।
‘छात्रों की गूंज’ बनाम जंतर-मंतर आंदोलन
थरूर ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी ने नीट (NEET) पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को सबसे पहले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए उठाया था, जिसमें राहुल गांधी ने स्वयं छात्रों को संबोधित किया था। हालांकि, यह कार्यक्रम उस स्तर का जन-प्रभाव (Impact) नहीं छोड़ सका। इसके विपरीत, जंतर-मंतर पर स्वतंत्र छात्र संगठनों और युवाओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों को व्यापक समर्थन मिला।
निष्ठा बनाम स्वतंत्र विचार
अपनी पार्टी के नेतृत्व से अलग या आलोचनात्मक राय रखने के सवाल पर थरूर ने अपना बचाव किया:
- लोकतांत्रिक स्पेस: थरूर ने कहा कि वह अपनी पार्टी के प्रति पूरी तरह वफादार हैं, लेकिन स्वतंत्र विचार व्यक्त करना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।
- सुनने की जरूरत: उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर जाने का उनका मकसद कोई भाषण देना नहीं, बल्कि युवाओं से बात करना और उनकी कहानियां व समस्याएं सुनना था।
शशि थरूर का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस के भीतर युवाओं और छात्रों तक अपनी बात प्रभावशाली ढंग से पहुंचाने के तरीकों को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।


