उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच तीखे जुबानी हमले और कटाक्ष तेज हो गए हैं। एक ओर लखनऊ में ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ के राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव पर निशाना साधा। वहीं दूसरी ओर, अखिलेश यादव ने भी सरकार के विज्ञापन खर्चों को लेकर मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए ‘कॉस्मेटिक फेशियल’ तक कह डाला।
सीएम योगी का तंज: “कुछ लोग जीवन भर बच्चे ही बने रहते हैं”
लखनऊ के लोक भवन में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने अखिलेश यादव की पुरानी दिनचर्या और कार्यशैली का जिक्र करते हुए कहा:
- ‘बबुआ’ की दिनचर्या पर तंज: सीएम योगी ने कहा कि कुछ लोग जीवन भर बच्चे ही बने रहते हैं। “बबुआ भी यही करते थे, दोपहर 12 बजे सोकर उठते थे, दो बजे तैयार होते थे, पांच बजते-बजते जिम जाने का समय हो जाता था और शाम 7 बजे महफिल सज जाती थी।”
- जनता की उपेक्षा का आरोप: मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नेताओं के पास देश और प्रदेश के विकास के बारे में सोचने के लिए समय ही नहीं था।
- कानून-व्यवस्था का मुद्दा: सपा शासनकाल को घेरते हुए योगी ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान राज्य में महिलाओं को सबसे बड़ा खतरा समाजवादी पार्टी के लोगों से ही था।
इसी दौरान उन्होंने उत्कृष्ट बुनकरों को ‘संत कबीर राज्य स्तरीय हथकरघा पुरस्कार’ से सम्मानित किया तथा ‘मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना’ के लाभार्थियों को वित्तीय सहायता के चेक वितरित किए।
अखिलेश यादव का पलटवार: “7000 करोड़ का कॉस्मेटिक फेशियल करवाया”
सीएम योगी के बयानों और सरकार की नीतियों के खिलाफ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार के विज्ञापन बजट और प्रचार तंत्र को लेकर तीखा हमला बोला।
- छवि चमकाने का आरोप: अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने विज्ञापनों और अपनी छवि चमकाने (ब्रांडिंग) के नाम पर जनता के टैक्स के लगभग 7,000 करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए।
- ‘विश्व रिकॉर्ड’ का तंज: सपा प्रमुख ने कटाक्ष करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी ने अपनी झूठी छवि को सच्चा दिखाने के लिए 7,000 करोड़ रुपये खर्च करके ‘कॉस्मेटिक फेशियल’ का एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है।
- संसाधनों की बर्बादी: उन्होंने कहा कि प्रचार पर इतने भारी बजट की बर्बादी प्रदेश की जनता के साथ धोखा है। यदि इस धन का उपयोग राज्य में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाता तो प्रदेश के लाखों युवाओं का भविष्य संवर सकता था।
राजनीतिक मायने
उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों और चुनाव की तैयारियों के बीच दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं के बीच इस तरह की बयानबाजी से राज्य का सियासी पारा काफी चढ़ गया है। एक तरफ जहां भाजपा सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और सपा के पुराने कार्यकाल की कमियों को उजागर कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी सरकार के विज्ञापनों, बेरोजगारी और प्रशासनिक विफलताओं को मुद्दा बनाकर लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए है।


