उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भूस्खलन (Landslides) के कारण राज्य के पर्वतीय इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जगह-जगह चट्टानों और पेड़ों के गिरने से कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways) और संपर्क मार्ग पूरी तरह से बंद हो गए हैं। सड़कों पर भारी मलबे के आने से वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है, जिसके चलते चारधाम यात्रा पर निकले हजारों श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक जगह-जगह फंस गए हैं।
भूस्खलन और मलबे से थमी रास्तों की रफ्तार
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार जारी भारी बारिश के कारण चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे संवेदनशील जिलों में स्थितियां गंभीर बनी हुई हैं:
- चमोली व बदरीनाथ हाईवे: बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पाताल गंगा, पागलनाला और लामबगड़ के पास पहाड़ी से भारी मात्रा में चट्टानें और मलबा सड़कों पर आ गिरा है। इसके कारण सीमांत इलाकों का संपर्क कट गया है।
- उत्तरकाशी व गंगोत्री मार्ग: उत्तरकाशी में लगातार पेड़ और भूस्खलन का मलबा गिरने से गंगोत्री और यमुनोत्री राजमार्ग कई स्थानों पर अवरुद्ध हो चुके हैं।
- पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित: तेज हवाओं और ढलानदार मिट्टी के खिसकने से कई प्रमुख मार्गों पर विशालकाय पेड़ धराशायी हो गए हैं, जिससे बिजली और संचार सेवाएं भी आंशिक रूप से प्रभावित हुई हैं।
जगह-जगह फंसे श्रद्धालु और यात्री
सड़कों के अचानक बंद हो जाने से बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं को बीच रास्ते में ही सुरक्षित स्थानों, पड़ावों और होटलों में रुकना पड़ा है। प्रशासन द्वारा यात्रियों को आगे की यात्रा फिलहाल स्थगित करने और सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की अपील की गई है।
राहत एवं बचाव कार्य जारी
- जेसीबी और पोकलैंड तैनात: लोक निर्माण विभाग (PWD) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की टीमों को भारी मशीनों के साथ मलबा हटाने के काम में लगाया गया है।
- प्रशासन की एडवाइजरी: मौसम विभाग (IMD) द्वारा राज्य के कई जिलों के लिए जारी भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर है। यात्रियों और स्थानीय निवासियों को नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों से दूर रहने की सलाह दी गई है।


