पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में नागरिक अधिकारों, सस्ती बिजली, सस्ते राशन और राजनीतिक सुधारों की मांग को लेकर उठ रही आवाज़ अब बेहद हिंसक और दुखद मोड़ पर पहुंच गई है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के तत्वावधान में निकाले गए एक विशाल ‘लॉन्ग मार्च’ के दौरान पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स द्वारा की गई अंधाधुंध गोलीबारी में कम से कम 40 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है और 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
1. कैसे भड़का खूनी संघर्ष?
PoK के नागरिक लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं और विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
- लॉन्ग मार्च पर हमला: हजारों की संख्या में निहत्थे नागरिक हाथों में सफेद झंडे लेकर रावलकोट से राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ रहे थे।
- अंधाधुंध बल प्रयोग: सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए भारी मात्रा में आंसू गैस के गोले छोड़े और सीधे गोलियां बरसाईं।
- अस्पतालों की घेराबंदी: रिपोर्टों के अनुसार, फायरिंग के बाद रावलकोट के मुख्य सरकारी अस्पताल को सेना ने अपने नियंत्रण में ले लिया, जिससे घायलों को समय पर इलाज मिलने में भारी दिक्कतें आईं।
निवासियों और महिलाओं पर अत्याचार: बाग, कोटली, मीरपुर और रावलकोट के आवासीय क्षेत्रों में चलाए गए तलाशी अभियानों के दौरान महिलाओं और नाबालिग बच्चों को भी निशाना बनाए जाने के दावे किए गए हैं।
2. मामला पहुंचा संयुक्त राष्ट्र (UN) के द्वार
पाकिस्तानी बलों की इस बर्बरता के खिलाफ मानवाधिकार संगठनों ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों का रुख किया है:
- यूएन से हस्तक्षेप की मांग: जम्मू-कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क को ज्ञापन सौंपकर तुरंत दमन रोकने, निहत्थे नागरिकों पर गोलीबारी बंद करने और रावलकोट में यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञों एवं मेडिकल टीमों को भेजने की मांग की है।
- वैश्विक अपील: ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ आजाद जम्मू एंड कश्मीर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव, रेड क्रॉस, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।
3. पाकिस्तान सरकार का रुख: बातचीत से इनकार
स्थिति इतनी बिगड़ने के बावजूद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकार प्रदर्शनकारियों से कोई बातचीत नहीं करेगी। आसिफ ने आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों की तुलना दुश्मनों से की और कहा कि सरकार इन आंदोलनों को बर्दाश्त नहीं करेगी।
व्यापक जनाक्रोश और मानवाधिकार उल्लंघनों के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ने के बाद भी पाकिस्तान सरकार की ओर से हताहतों का कोई ठोस आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है।


