NEET-UG परीक्षा में हुई कथित धांधली को लेकर चले हफ्ते भर लंबे छात्र आंदोलन के बाद, 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और आंदोलनकारियों ने इसे छात्रों की ऐतिहासिक जीत करार दिया। हालांकि, इस इस्तीफे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें CJP के मुख्य सदस्य एक दिल्ली के फाइव स्टार होटल में जश्न मनाते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद आंदोलन के तरीकों और नेताओं की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
वायरल वीडियो और जश्न की तस्वीरें
वायरल हो रहे वीडियो में CJP के प्रमुख प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरभ दास सहित अन्य कार्यकर्ता लग्जरी होटल में संगीत की धुन पर डांस करते और जश्न मनाते दिख रहे हैं।
- लग्जरी माहौल: रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पार्टी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के ठीक अगले दिन आयोजित की गई थी।
- जमीन से जुड़े चेहरों की गैरमौजूदगी: वीडियो में देखा गया कि जंतर-मंतर पर दिन-रात डटे रहने वाले और जमीन पर संघर्ष करने वाले प्रमुख कार्यकर्ताओं जैसे कि मोहम्मद जुनैद (Mohammed Junaid) और ‘फैन मैन’ इस सेलिब्रेशन से पूरी तरह गायब थे।
सोशल मीडिया और आलोचकों द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल
वीडियो के सामने आते ही इंटरनेट और राजनीतिक गलियारों में CJP नेतृत्व की तीखी आलोचना शुरू हो गई है। आलोचकों और आम उपयोगकर्ताओं ने निम्नलिखित प्रमुख प्रश्न उठाए हैं:
| सवाल का क्षेत्र | मुख्य आपत्ति व बिंदु |
| नैतिकता और संवेदनशीलता | छात्रों के भविष्य और आत्महत्या से पीड़ित परिवारों के प्रति असंवेदनशीलता पर सवाल; क्या किसी मंत्री के इस्तीफे का जश्न लग्जरी होटल में मनाना उचित है? |
| आंदोलन की फंडिंग | एक छात्र आंदोलन के नेताओं द्वारा फाइव स्टार होटल में महंगी पार्टी आयोजित करने के लिए पैसा कहां से आया? |
| एलीट बनाम ग्राउंड वर्कर | धूप और लाठियां खाने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर एलीट प्रवक्ताओं का अकेले जश्न मनाना कितना सही है? |
आलोचकों का रुख: कई लोगों का कहना है कि जिस आंदोलन को आम और गरीब छात्रों का संघर्ष बताकर खड़ा किया गया था, उसके शीर्ष नेताओं का यह रवैया उनकी ‘एलीट’ मानसिकता और जमीनी वास्तविकताओं से दूरी को दर्शाता है।
CJP का रुख और भावी स्थिति
हालांकि, CJP समर्थकों का तर्क है कि यह हफ्तों के कठिन मानसिक तनाव और आंदोलन की सफलता के बाद कार्यकर्ताओं की एक अनौपचारिक बैठक थी। लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किए जाने और लग्जरी सेलिब्रेशन के आरोपों ने इस छात्र संगठन के भीतर भी गुटबाजी और असंतोष की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।


