देश में पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर चल रही चर्चाओं और आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने संसद में स्थिति साफ कर दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा और राज्यसभा में लिखित जवाब देकर स्पष्ट किया कि फिलहाल देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिलाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है।
भविष्य की योजना और तकनीकी अध्ययन
सरकार ने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि 20% से अधिक ब्लेंडिंग (जैसे E25 या E30) पर कोई भी निर्णय लिया जाता है, तो वह केवल विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययनों और सभी प्रमुख हितधारकों के साथ परामर्श के बाद ही होगा:
- हितधारकों से राय: वाहन निर्माताओं (SIAM), शोध संस्थानों (ARAI, IIP) और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के साथ गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
- फ्लेक्स फ्यूल वाहन (FFVs): उच्च इथेनॉल मिश्रण जैसे E85 केवल विशेष रूप से निर्मित फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए है, इसे सामान्य पेट्रोल सप्लाई में नहीं मिलाया जाएगा।
- डीजल में ब्लेंडिंग: फिलहाल डीजल में इथेनॉल ब्लेंडिंग शुरू करने का भी कोई व्यावसायिक प्रस्ताव नहीं है।
इंजन की सुरक्षा पर सरकार का दावा
सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल से वाहनों के इंजन खराब होने और माइलेज घटने के दावों को खारिज करते हुए सरकार ने वैज्ञानिक प्रमाण पेश किए:
“देश में इस समय 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर बिना किसी बड़े पैमाने पर इंजन खराबी की शिकायत के चल रही हैं। E20 एक सुरक्षित, स्वच्छ और तकनीक रूप से बेहतर फ्यूल है।” — सुरेश गोपी, राज्य मंत्री
मंत्रालय के अनुसार, नीति आयोग, IOCL और ARAI के फील्ड ट्रायल और प्रयोगशाला परीक्षणों में यह साबित हुआ है कि स्वीकृत मानकों के अनुसार इस्तेमाल करने पर E20 से गाड़ियों के इंजन में कोई असामान्य टूट-फूट नहीं होती। पुरानी गाड़ियों में माइलेज में 3% से 5% तक की ही मामूली भिन्नता आ सकती है।


