देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के मामलों से उपजे जन-आक्रोश के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कड़े कानूनी चाबुक की तैयारी कर ली है। मोदी कैबिनेट ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में ऐतिहासिक संशोधनों को मंजूरी देकर इसे और अधिक प्रभावकारी बनाने जा रही है।
इस कदम का सीधा मकसद संगठित गिरोहों, बिचौलियों और परीक्षाओं में धांधली कराने वाली एजेंसियों के मन में सख्त खौफ पैदा करना है।
कानून में प्रस्तावित मुख्य बदलाव और कड़े प्रावधान
- 10 साल तक की कठोर कैद: संगठित अपराध (Organized Crime) के तहत पेपर लीक और धांधली में शामिल गिरोहों के लिए सजा की अवधि बढ़ाकर 5 से 10 वर्ष तक के कठोर कारावास में बदली जा रही है। वहीं, व्यक्तिगत स्तर पर नकल करने या किसी की जगह परीक्षा देने पर 3 से 5 साल की जेल का प्रावधान है।
- ₹1 करोड़ तक का भारी जुर्माना: पेपर लीक माफियाओं और दोषी पाई गई एजेंसियों पर ₹1 करोड़ तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा। यदि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की लापरवाही पाई जाती है, तो परीक्षा की पूरी लागत उससे वसूली जाएगी और संपत्ति भी जब्त की जा सकती है।
- 6 माह में सजा और फास्ट-ट्रैक कोर्ट: मामलों के समयबद्ध निस्तारण के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों (Fast-Track Courts) का गठन करने का निर्देश दिया गया है। इसका मुख्य लक्ष्य 6 महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजना है।
- गैर-जमानती अपराध (Non-Bailable): प्रस्तावित संशोधनों के बाद इस कानून के तहत दर्ज होने वाले अपराध पूरी तरह गैर-जमानती होंगे, जिससे आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिल सकेगी।
युवाओं के विश्वास को बहाल करने की कोशिश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस संशोधन बिल को संसद में पेश कर जल्द पारित कराने की योजना है।
इन कड़े प्रावधानों से जहां एक तरफ देश में निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली स्थापित होगी, वहीं दूसरी तरफ सालों से मेहनत कर रहे युवाओं का न्याय प्रणाली और परीक्षाओं के प्रति भरोसा मजबूत होगा।


