खाड़ी क्षेत्र (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के ठिकानों पर लगातार 13वीं रात की गई बमबारी के बाद वैश्विक बाजारों में हड़कंप मच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने और लाल सागर में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) 7% उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है।
CENTCOM का एक्शन: ईरान के सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि उसने 23 जुलाई की रात ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले किए।
- लक्षित ठिकाने: अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के कमांड सेंटर्स, ड्रोन और मिसाइल स्टोरेज फैसिलिटीज, एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी राडार और सैन्य संचार नेटवर्क को निशाना बनाया।
- हमले का कारण: CENTCOM के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले नागरिक व व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरानी धमकियों को बेअसर करने के लिए की गई है।
होर्मुज और लाल सागर में दोहरी चुनौती
दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और LNG आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती है।
- होर्मुज में नाकाबंदी का खतरा: अमेरिकी हमलों और ईरानी जहाजों की आक्रामक आवाजाही के कारण होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन लगभग ठप या काफी धीमा हो चुका है।
- बाब-अल-मंदेब में हुती हमले: यमन के ईरान समर्थित हुती विद्रोहियों ने लाल सागर (Red Sea) और बाब-अल-मंदेब में तेल टैंकरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिससे सऊदी अरब का बैकअप सप्लाई रूट भी खतरे में पड़ गया है।
तेल $100 के पार: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट
खाड़ी संकट का सीधा और भयानक असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें मई के बाद पहली बार $100.69 प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी तेजी से ऊपर चढ़कर $90 के पार चला गया है।
बाजार विशेषज्ञों की चेतावनी: यदि होर्मुज मार्ग जल्द पूरी तरह नहीं खुला, तो साल के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें $120 से $150 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इससे दुनियाभर में ईंधन महंगा होगा और महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है।
ट्रंप का कड़ा रुख और आगे की स्थिति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी जारी की है कि यदि होर्मुज में अमेरिकी या अन्य सहयोगी जहाजों को कोई नुकसान पहुंचता है, तो उसकी भरपाई अमेरिका में जब्त ईरानी संपत्तियों से की जाएगी। वहीं, ईरान ने भी साफ कर दिया है कि जब तक उसके ठिकानों पर हमले रुकते नहीं, खाड़ी से किसी को तेल व्यापार करने नहीं दिया जाएगा। दोनों पक्षों के अड़े रहने से स्थिति एक भीषण वैश्विक ऊर्जा संकट और पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ती दिख रही है।


