नीट (NEET) पेपर लीक और शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार को लेकर देश में सियासी और सामाजिक घमासान तेज हो गया है। एक तरफ जहां दिल्ली से लेकर राज्यों तक विरोध प्रदर्शन जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार और विपक्ष के बीच जुबानी जंग भी तीखी होती जा रही है।
वांगचुक का अनशन खत्म, सरकार के साथ वार्ता आज
पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लगातार 26 दिनों से जारी अपना अनशन आखिरकार समाप्त कर दिया है। आज सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। हालांकि, छात्र नेता दीपक का कहना है कि मांगों के पूरी तरह लागू होने तक जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा।
राहुल गांधी का सरकार पर हमला: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश के तुरंत बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) के जरिए सरकार को आड़े हाथों लिया। राहुल गांधी ने कहा, धर्मेंद्र प्रधान को छात्रों के भरोसे से खिलवाड़ करने की जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत पद से इस्तीफा देना चाहिए। सरकार को प्रदर्शनकारी छात्रों की बुद्धिमत्ता और उनकी जायज मांगों का अपमान नहीं करना चाहिए। आंदोलनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं और सरकार छात्रों से आधिकारिक माफी मांगे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री का संदेश निराशाजनक है और सरकार परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही तय करने के बजाय पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही है।
पीएम मोदी का छात्रों को भरोसा: सख्त कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात छात्रों और अभिभावकों के नाम एक विशेष वीडियो संदेश जारी किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और उनके परिवारों के भविष्य पर हमला है।
“पिछले ढाई महीनों में पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है और कई मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा गया है।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि पेपर लीक और परीक्षा में धांधली को रोकने के लिए नया कानून प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जा रहा है।
- NEET पेपर लीक मामले ने देश की संपूर्ण परीक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां छात्र निष्पक्ष न्याय और व्यवस्था में बुनियादी सुधार की मांग पर अड़े हैं, वहीं अब देखना यह होगा कि आज होने वाली सरकारी बैठकों और घोषित कानूनी कदमों से छात्रों का भरोसा कितना बहाल हो पाता है।


