सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित संसद मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस की ओर से की गई कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध (urgent listing) करने का अनुरोध किया था।
शीर्ष अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस ने भारी बल प्रयोग किया है और उनके पास इसके वीडियो प्रमाण मौजूद हैं, तो मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा:
“हमारा समय बर्बाद न करें और अपना समय भी बर्बाद न करें। हम वीडियो देखने में रुचि नहीं रखते हैं और हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है।”
इसके बाद पीठ ने मामले की त्वरित सुनवाई की याचिका को खारिज कर दिया।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 20 जुलाई 2026 (संसद के मानसून सत्र के पहले दिन) का है, जब CJP के नेतृत्व में हजारों छात्रों और युवाओं ने ‘संसद चलो’ मार्च निकाला था।
- प्रमुख मांग: प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे NEET) में कथित धांधली और पेपर लीक के मुद्दों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और National Testing Agency (NTA) में सुधार की मांग की जा रही थी।
- पुलिस कार्रवाई: प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हो गए।
दिल्ली हाईकोर्ट भी कर चुका है इनकार
सुप्रीम कोर्ट से पहले 21 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की पीठ ने मौखिक रूप से कहा था— “अदालत को इन सब मामलों में मत घसीटिए, यह अपने नियमित क्रम में आएगा।”


