संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2026) पेपर लीक मामले और शिक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का ‘चलो संसद’ मार्च भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सुबह से ही हजारों की संख्या में छात्र और प्रदर्शनकारी जुटना शुरू हो गए थे। सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली पुलिस ने पहले ही संसद भवन के आसपास धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू कर रखी थी और इस मार्च को आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी।
जंतर-मंतर पर टकराव और लाठीचार्ज
जैसे ही CJP के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने सुबह 9 बजे जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया, वहां तैनात भारी सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया।
- बैरिकेडिंग और धक्कामुक्की: दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और नगालैंड आर्म्ड फोर्स के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए त्रिस्तरीय बैरिकेडिंग कर रखी थी। बैरिकेड्स लांघने की कोशिश कर रहे युवाओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी बहस और धक्कामुक्की शुरू हो गई।
- बल प्रयोग: भीड़ को नियंत्रित करने और पीछे धकेलने के लिए रैपिड एक्शन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर हल्का लाठीचार्ज किया, जिससे जंतर-मंतर पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हालांकि, पुलिस का कहना है कि स्थिति को काबू में रखने के लिए न्यूनतम बल प्रयोग किया गया था।
- मेट्रो स्टेशन बंद: सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए डीएमआरसी (DMRC) ने राजीव चौक, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और जनपथ समेत कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को आम जनता के लिए बंद कर दिया।
जेपी नड्डा से मिलने पहुंचा प्रतिनिधिमंडल
तनावपूर्ण स्थिति के बीच, आंदोलन के नेतृत्व और सरकार के बीच बातचीत का रास्ता साफ हुआ। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके (जो खुद तीन दिनों से भूख हड़ताल पर हैं) के दिशा-निर्देशन में पार्टी के वरिष्ठ प्रतिनिधि सौरभ और आशुतोष केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात करने पहुंचे हैं।
CJP की मुख्य मांगें: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा, परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करना और हालिया कथित अनियमितताओं के कारण प्रभावित हुए छात्रों को राहत देना।
इससे पहले, 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को तबीयत बिगड़ने के कारण पुलिस ने शनिवार को जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया था, जिसके बाद से आंदोलन और उग्र हो गया है। विपक्ष के कई सांसदों ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों के इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है।


