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    अमेरिकी हवाई हमले में चाबहार पोर्ट का निगरानी टावर ढहा, भारत और ईरान को झटका

    ​अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य टकराव के बीच, ओमान की खाड़ी पर स्थित ईरान के बेहद रणनीतिक चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) को भारी नुकसान पहुंचा है. 17 जुलाई 2026 को तड़के हुए अमेरिकी हवाई हमलों में चाबहार पोर्ट का एक प्रमुख समुद्री निगरानी और यातायात नियंत्रण टावर (Maritime Control/Surveillance Tower) पूरी तरह ढह गया है.

    ​राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना (CENTCOM) द्वारा ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर की जा रही इस बमबारी का यह लगातार छठा दिन था.

    ​हमले से जुड़ी मुख्य बातें और नुकसान

    • तीसरी बार निशाना: पिछले एक हफ्ते के भीतर चाबहार पोर्ट के इस कंट्रोल टावर को अमेरिकी फाइटर जेट्स और ड्रोन्स द्वारा तीसरी बार निशाना बनाया गया, जिसके बाद यह ढांचा पूरी तरह जमींदोज हो गया.
    • रक्षा सचिव ने जारी की तस्वीर: अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने सोशल मीडिया पर इस टावर के ढहने की तस्वीरें साझा कर हमले की पुष्टि की है.
    • ईरान का रुख: ईरानी मीडिया ने चाबहार पर अमेरिकी हमलों के तीसरे दौर की बात स्वीकार की है. ईरान का कहना है कि इस टावर का इस्तेमाल विशुद्ध रूप से वाणिज्यिक जहाजों की निगरानी के लिए होता था, हालांकि पश्चिमी देशों का आरोप है कि यहां ईरान की पैरामिलिट्री ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) की भी सक्रिय मौजूदगी रहती है.
    • बिजली संकट: इस भीषण बमबारी के कारण चाबहार और उसके आसपास के बड़े इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था ठप हो गई है.

    ​रणनीतिक बंदरगाह क्यों आया निशाने पर?

    ​अमेरिका द्वारा ईरान के तटीय रक्षा तंत्र, पुलों और रेलवे स्टेशनों को निशाना बनाने का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान के प्रभाव को कमजोर करना है.

    चाबहार का महत्व: यह बंदरगाह होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर सीधे अरब सागर में खुलता है. ईरान इस रास्ते का उपयोग अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और नाकेबंदी से बचकर व्यापार करने के लिए करता रहा है. यही वजह है कि अमेरिका इसके समुद्री नियंत्रण को पूरी तरह पंगु बनाना चाहता है.

    ​भारत और वैश्विक व्यापार पर क्या होगा असर?

    ​चाबहार बंदरगाह पर हुआ यह हमला वैश्विक व्यापार और विशेष रूप से भारत के लिए बेहद चिंताजनक है:

    1. भारत का बड़ा निवेश: भारत ने चाबहार पोर्ट के ‘शाहिद बेहेश्ती’ टर्मिनल को विकसित करने और उसे संचालित करने के लिए दीर्घकालिक निवेश किया है. यह भारत के लिए पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँचने का एकमात्र सीधा समुद्री-रूट है.
    2. सप्लाई चेन को झटका: टावर के ढहने और पोर्ट को पहुंचे नुकसान से इस मार्ग से होने वाला सारा व्यापारिक और मानवीय सहायता (जैसे अफगानिस्तान जाने वाला अनाज) का परिवहन पूरी तरह रुक गया है.
    3. ईरान की जवाबी कार्रवाई: इस हमले के जवाब में IRGC ने सीरिया और खाड़ी देशों (कतर, बहरीन, कुवैत) में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार (क्रूड ऑयल) में भारी अस्थिरता पैदा हो गई है.

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