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    दृढ़ संकल्प की मिसाल: 5 बार प्रीलिम्स में असफलता, छठे प्रयास में सीधे IAS बनीं आकृति सेठी

    संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सफलता चंद लोगों के ही हिस्से आती है। कई उम्मीदवार लगातार मिल रही असफलताओं से टूटकर अपना रास्ता बदल लेते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो हार मानने को तैयार नहीं होते। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है हरियाणा के अंबाला की रहने वाली आकृति सेठी की, जिन्होंने एक-दो नहीं बल्कि पूरे पांच बार शुरुआती चरण (प्रीलिम्स) में फेल होने के बावजूद हार नहीं मानी और अपने छठे प्रयास में सीधे देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा यानी IAS का पद हासिल किया।

    शुरुआती असफलताएं और लगातार निराशा का दौर

    आकृति सेठी का यूपीएससी का सफर आसान नहीं था। जब उन्होंने इस यात्रा की शुरुआत की, तो उन्हें लगातार बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

    • लगातार पांच विफलताएं: आकृति ने लगातार पांच बार यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) दी और हर बार उन्हें असफलता हाथ लगी। किसी भी उम्मीदवार के लिए लगातार पांच साल तक पहले ही चरण से बाहर हो जाना मानसिक रूप से बेहद थका देने वाला और निराशाजनक होता है।
    • समाज और अपनों का दबाव: इतनी असफलताओं के बाद आमतौर पर आसपास के लोग और समाज आपके सामर्थ्य पर सवाल उठाने लगते हैं। कई बार खुद के भीतर भी आत्म-संदेह (Self-doubt) की भावना पैदा होने लगती है, लेकिन आकृति के सिर पर अफसर बनने का जुनून इस कदर सवार था कि उन्होंने अपने इरादे कमजोर नहीं होने दिए।

    क्या थी छठे प्रयास की रणनीति?

    लगातार मिल रही हार के बाद आकृति ने अपनी कमियों को पहचाना और अपनी पूरी रणनीति को नए सिरे से तैयार किया:

    1. कमियों का बारीक विश्लेषण: आकृति ने यह समझने की कोशिश की कि आखिर वे हर बार प्रीलिम्स में कहां चूक रही थीं। उन्होंने अपने कमजोर विषयों को चिह्नित किया और उन पर दोगुनी मेहनत की।
    2. मॉक टेस्ट और अभ्यास: उन्होंने छठे प्रयास के लिए प्रीलिम्स के मॉक टेस्ट पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया। निगेटिव मार्किंग को कम करने और समय प्रबंधन (Time Management) को बेहतर करने के लिए उन्होंने सैकड़ों टेस्ट पेपर्स हल किए।
    3. मानसिक मजबूती: उन्होंने खुद को बाहरी नकारात्मकता से पूरी तरह दूर कर लिया और केवल अपनी पढ़ाई व लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा।

    छठा प्रयास: सीधे आईएएस बन रचा इतिहास

    साल दर साल की कड़ी मेहनत, धैर्य और कभी न हार मानने वाले जज्बे का फल आखिरकार छठे प्रयास में मिला। इस बार न केवल उन्होंने अपनी सबसे बड़ी बाधा यानी प्रीलिम्स को पार किया, बल्कि मुख्य परीक्षा (Mains) और इंटरव्यू (Personality Test) में भी असाधारण प्रदर्शन किया। जब अंतिम परिणाम घोषित हुआ, तो उनका चयन सीधे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए हो गया। वर्तमान में वह तमिलनाडु के कृष्णागिरी में सब-कलेक्टर (Sub-Collector, Krishnagiri, Tamil Nadu) के पद पर तैनात होकर देश की सेवा कर रही हैं।

    सफलता का संदेश: आकृति सेठी की यह कहानी उन लाखों यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी सीख है जो एक या दो प्रयासों में असफल होकर उम्मीद खो देते हैं। उनकी कहानी साबित करती है कि यदि आपके इरादे मजबूत हों, आपके अंदर अपनी गलतियों से सीखने का जज्बा हो और आप लगातार मेहनत करने को तैयार हों, तो कोई भी बाधा आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।

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