More
    HomeHindi NewsDelhi Newsमहिला आरक्षण और परिसीमन बिल पेश होगा, अठावले का बड़ा दावा, हमारे...

    महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पेश होगा, अठावले का बड़ा दावा, हमारे पास दो तिहाई बहुमत

    केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI-A) के प्रमुख रामदास अठावले ने आगामी मानसून सत्र से पहले एक बड़ा राजनीतिक दावा किया है। उन्होंने कहा है कि संसद के आगामी मानसून सत्र में महिला आरक्षण और देश में होने वाले नए परिसीमन (Delimitation) से जुड़े अहम विधेयकों को पारित कराने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। अठावले के मुताबिक, सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास अब संसद में इन ऐतिहासिक सुधारों को लागू करने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत मौजूद है।

    रामदास अठावले का बड़ा दावा

    नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को पूरी तरह से जमीन पर उतारने और आगामी लोकसभा व विधानसभा चुनावों के लिए सीटों के नए सिरे से निर्धारण (परिसीमन) को लेकर सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    • बहुमत का समीकरण: अठावले ने दावा किया, “संसद के दोनों सदनों में अब हमारे पास दो-तिहाई (Two-Thirds Majority) का मजबूत आंकड़ा है। इसलिए संविधान संशोधन से जुड़े इन महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में कोई संवैधानिक या राजनीतिक अड़चन नहीं आएगी।”
    • मानसून सत्र पर नजर: उन्होंने भरोसा जताया कि जुलाई-अगस्त में शुरू होने वाले आगामी मानसून सत्र के दौरान ही इन विधेयकों को संसद के पटल पर रखा जाएगा और देश को एक नई दिशा मिलेगी।

    महिला आरक्षण और परिसीमन का अंतर्संबंध

    गौरतलब है कि साल 2023 में संसद के विशेष सत्र के दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) को पारित किया गया था, जिसके तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि, इस कानून में एक महत्वपूर्ण शर्त जोड़ी गई थी:

    1. डिजिटल जनगणना: कानून के मुताबिक, आरक्षण को लागू करने से पहले देश में नई जनगणना (डिजिटल सेंसस) के आंकड़े जारी होने जरूरी हैं।
    2. परिसीमन की प्रक्रिया: जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण यानी परिसीमन किया जाएगा, जिसके बाद ही महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की जा सकेंगी।

    विपक्ष की आशंकाएं और राजनीतिक सरगर्मी

    रामदास अठावले के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों, विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना) के नेताओं ने परिसीमन की टाइमलाइन को लेकर पहले भी कई चिंताएं जताई हैं। विपक्ष का आरोप है कि जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन से उन राज्यों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है।

    अठावले का आश्वासन: विपक्ष की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए अठावले ने साफ किया कि सरकार देश के सभी हिस्सों के प्रतिनिधित्व और विकास को ध्यान में रखकर ही कदम बढ़ाएगी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे देश में महिलाओं के सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने वाले इस ऐतिहासिक कदम का संसद में एक सुर में समर्थन करें।

    RELATED ARTICLES

    Most Popular

    Recent Comments