बांकीपुर उपचुनाव से पहले प्रशांत किशोर को तगड़ा झटका, केसी सिन्हा और बिट्टू सिंह समेत कई नेता बीजेपी में शामिल
बिहार विधानसभा के बांकीपुर उपचुनाव से ठीक पहले राजनीतिक गलियारों में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी सिन्हा और पटना नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर रहे बिट्टू सिंह समेत कई प्रमुख नेताओं ने जन सुराज का दामन छोड़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस घटनाक्रम को बांकीपुर सीट पर होने वाले चुनावी मुकाबले के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
रणनीति और जमीनी राजनीति में फर्क: बिट्टू सिंह
बीजेपी में शामिल होने के बाद नेताओं ने प्रशांत किशोर की कार्यशैली पर जमकर निशाना साधा। पूर्व डिप्टी मेयर बिट्टू सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रशांत किशोर एक बेहतरीन रणनीतिकार (इलेक्शन स्ट्रेटजिस्ट) हो सकते हैं, लेकिन एक राजनीतिक दल चलाना और जमीन पर राजनीति करना बिल्कुल अलग बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि जन सुराज के भीतर कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान नहीं हो रहा था। बिट्टू सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका और उनके समर्थकों का पूरा ध्यान अब बांकीपुर उपचुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रत्याशी को भारी बहुमत से विजयी बनाने पर होगा।
बीजेपी का बांकीपुर किला और प्रशांत किशोर की चुनौती
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र को पारंपरिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का बेहद मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, जहां पिछले कई दशकों से बीजेपी एकतरफा जीत दर्ज करती आई है। इस उपचुनाव में बीजेपी ने एक युवा और जमीनी कार्यकर्ता नीरज सिन्हा पर दांव खेला है। वहीं दूसरी तरफ, जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर खुद इस सीट से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं, जिसे उनके जीवन का पहला प्रत्यक्ष चुनावी मुकाबला माना जा रहा है।
ऐसे में चुनाव की घोषणा और नामांकन प्रक्रिया के बीच जन सुराज के कद्दावर स्थानीय नेताओं का टूटकर बीजेपी में जाना प्रशांत किशोर के लिए एक बड़ी रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक चुनौती बन गया है।
बहरहाल, बांकीपुर उपचुनाव अब पूरी तरह से त्रिकोणीय और दिलचस्प मोड़ पर आ गया है, जहां एक तरफ बीजेपी अपना पुराना किला बचाने की जद्दोजहद में है, तो वहीं प्रशांत किशोर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता और ‘बिहार बदलने’ के दावे को जमीन पर साबित करने की चुनौती से जूझ रहे हैं।


