बॉलीवुड अभिनेता दिलजीत दोसांझ की बहुचर्चित फिल्म ‘सतलज’ (Satluj) (जिसका पुराना नाम पंजाब 95 था) को लेकर देश के ओटीटी और राजनीतिक गलियारों में भारी घमासान मचा हुआ है। यह फिल्म 3 जुलाई 2026 को बिना किसी पूर्व घोषणा के अचानक ZEE5 पर रिलीज कर दी गई, लेकिन महज 48 घंटों के भीतर ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा (डिफ्लेट) दिया गया।
अब इस पूरे मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने एक इंटरव्यू में उस रात की पूरी कहानी बयां की है कि कैसे इस फिल्म को एक ‘सीक्रेट ऑपरेशन’ की तरह रिलीज किया गया था और बाद में सरकार की दखल के बाद क्या परिस्थितियां बनीं।
एक ‘सीक्रेट मिशन’ की तरह रिलीज हुई थी फिल्म
निर्देशक हनी त्रेहान ने बताया कि यह फिल्म पिछले 4 साल से सेंसर बोर्ड (CBFC) के चक्कर काट रही थी और बोर्ड ने इस पर 127 कट्स लगाने की मांग की थी। फिल्म के मेकर्स (RSVP मूवीज और मैगफिन पिक्चर्स) इस बात पर अड़े थे कि वे फिल्म की मूल आत्मा और रचनात्मकता से कोई समझौता नहीं करेंगे।
थियेटर्स में सेंसरशिप के लंबे झंझट से बचने के लिए मेकर्स और ZEE5 ने एक बेहद गोपनीय और साहसिक रणनीति तैयार की। उन्होंने बिना किसी ट्रेलर लॉन्च, बिना किसी प्रमोशन या सोशल मीडिया बज के, शुक्रवार (3 जुलाई) की शाम को अचानक फिल्म को अनकट (बिना किसी कट के) ‘सतलज’ नाम से लाइव कर दिया। हनी त्रेहान के मुताबिक, यह सब इतनी गोपनीयता से किया गया कि रिलीज के वक्त तक फिल्म इंडस्ट्री में भी किसी को इसकी भनक नहीं थी।
रिलीज के बाद एक्शन में आई सरकार और ZEE5 की चिट्ठी
जैसे ही फिल्म लाइव हुई, दर्शकों और आलोचकों ने इसे हाथों-हाथ लिया और सोशल मीडिया पर इसकी जमकर तारीफ होने लगी। लेकिन रविवार (5 जुलाई) की शाम होते-होते यह फिल्म अचानक भारत में गायब हो गई।
हनी त्रेहान ने बताया कि फिल्म के अचानक हिट होते ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (मोदी सरकार) हरकत में आ गया। सरकार ने सुरक्षा और संवेदनशीलता चिंताओं का हवाला देते हुए ZEE5 प्लेटफॉर्म को एक आधिकारिक नोटिस/चिट्ठी भेजी, जिसके बाद प्लेटफॉर्म को कानूनी प्रक्रियाओं के तहत फिल्म की स्ट्रीमिंग को भारत में ‘अस्थायी रूप से रोकना’ (Pause) पड़ा। ZEE5 ने भी बयान जारी कर कहा कि “मौजूदा घटनाक्रमों को देखते हुए सतलज अगले आदेश तक भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी”। हालांकि, ओटीटी प्लेटफॉर्म ने साफ किया है कि वे फिल्म के क्रिएटिव विजन के साथ मजबूती से खड़े हैं और इसे कानूनी रूप से बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
⚖️ क्या है फिल्म की कहानी और विवाद की वजह?
| मुख्य विषय | मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक |
| मुख्य भूमिका | दिलजीत दोसांझ (खालरा के रोल में), अर्जुन रामपाल (CBI अफसर) |
| विवाद का कारण | 1990 के दशक में पंजाब पुलिस द्वारा किए गए कथित फर्जी एनकाउंटर और 25,000 लावारिस शवों को जलाने के खुलासे पर आधारित |
| मौजूदा स्थिति | पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में फिल्म को दोबारा बहाल करने के लिए PIL दाखिल |
हनी त्रेहान का संदेश: “एक फिल्म निर्माता के रूप में, अपनी कला को इस तरह रोके जाते देखना दुखद है। लेकिन मुझे खुशी है कि उन 48 घंटों में ही लाखों लोगों ने सच को देख लिया। हम हार नहीं मानेंगे और कानूनी दायरे में रहकर इसे वापस लाने की लड़ाई लड़ेंगे।” सरकार ने फिलहाल इस मामले की जांच के लिए एक 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है जो फिल्म के कंटेंट की दोबारा समीक्षा करेगी।


