More
    HomeHindi NewsEntertainment'धमाल 4' ने सिनेमाघरों में दी दस्तक, क्या है फिल्म की कहानी?...

    ‘धमाल 4’ ने सिनेमाघरों में दी दस्तक, क्या है फिल्म की कहानी? जानें रिव्यु

    फिल्म: धमाल 4 (Dhamaal 4), निर्देशक: इंद्र कुमार, कलाकार: अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख, जावेद जाफरी, संजय मिश्रा, रवि किशन, संजीदा शेख, अंजलि आनंद, ईशा गुप्ता, रेटिंग: 2.0/5 स्टार

    बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय और कल्ट कॉमेडी फ्रेंचाइजी में से एक ‘धमाल’ अपनी चौथी किस्त ‘धमाल 4’ के साथ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। निर्देशक इंद्र कुमार एक बार फिर अपनी पुरानी पलटन और कुछ नए चेहरों के साथ पागलपंती और बिना लॉजिक वाली कॉमेडी का डबल डोज लेकर लौटे हैं। लेकिन क्या यह फिल्म पुरानी ‘धमाल’ जैसा जादू बिखेरने में कामयाब रही है? आइए जानते हैं।

    क्या है फिल्म की कहानी?

    फिल्म की कहानी इस बार भी फ्रेंचाइजी के पुराने ढर्रे पर चलती है, लेकिन इस बार कैनवास को थोड़ा बड़ा और एडवेंचरस बनाया गया है। चार लालची लेकिन बेहद बदकिस्मत दोस्त एक बार फिर “ट्रेज़र ऑफ़ लाइफ़” यानी एक गुप्त खजाने की खोज में निकलते हैं। यह तलाश उन्हें तूफानी समंदर, अजीबोगरीब टापुओं, समुद्री डाकुओं और गुप्त गुफाओं के बीच ले जाती है। इस सफर में उनका सामना भूतिया रातों से लेकर ऑक्टोपस, मगरमच्छ, बाघ और सांप जैसे जंगली जीवों से होता है, जिससे फिल्म में थ्रिल और कॉमेडी का तड़का लगाने की कोशिश की गई है।

    निर्देशन और स्क्रीनप्ले: हिट और मिस का खेल

    इंद्र कुमार ने इस बार स्लैपस्टिक कॉमेडी के साथ एडवेंचर, हीस्ट और हॉरर एलिमेंट्स को एक साथ मिक्सर में पीसने का प्रयास किया है। फिल्म का पहला हाफ कुछ जगहों पर काफी हंसाता है, लेकिन कई जगहों पर जोक्स जबरदस्ती ठूंसे हुए और लाउड लगते हैं। स्क्रीनप्ले में गहराई की कमी साफ खलती है। इंटरवल के बाद फिल्म थोड़ी गति पकड़ती है और क्लाइमेक्स में भावनाओं का हल्का सा पुट (तड़का) भी देखने को मिलता है। अगर आप थिएटर में ‘दिमाग के दरवाजे बंद करके’ केवल टाइमपास के लिए जा रहे हैं, तो यह एक स्ट्रेसबस्टर साबित हो सकती है, लेकिन लॉजिक ढूंढने वालों को निराशा हाथ लगेगी।

    अभिनय: पुरानी पलटन ने संभाला मोर्चा

    अभिनय के मामले में फिल्म के पुराने किरदारों ने अपनी लाज बचाए रखी है। आदि और मानव के रूप में अरशद वारसी और जावेद जाफरी की जुगलबंदी आज भी कमाल की है। जावेद जाफरी अपनी मासूमियत और गजब की कॉमिक टाइमिंग से कई सीन्स में शो चुरा ले जाते हैं।

    • अजय देवगन स्क्रीन पर ठीक-ठाक लगे हैं, लेकिन उनके कद के हिसाब से उनके किरदार को और बेहतर लिखा जा सकता था। रितेश देशमुख और अंजलि आनंद के हिस्से सबसे बेहतरीन रोल आए हैं। रितेश ने क्लाइमेक्स के इमोशनल सीन्स में भी शानदार काम किया है। संजय मिश्रा हमेशा की तरह स्क्रीन पर आते ही चेहरे पर मुस्कान ले आते हैं। फ्रेंचाइजी में नए शामिल हुए रवि किशन ने अपनी नई ऊर्जा से फिल्म में जान फूंकने की अच्छी कोशिश की है।

    संगीत और तकनीकी पक्ष

    फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर लाउड है जो सिचुएशनल कॉमेडी को सहारा देता है। फिल्म में लोकप्रिय मराठी गाने ‘गुलाबी साड़ी’ और ‘चटनी’ के रीवैम्प (रीमेक) वर्जन का इस्तेमाल किया गया है, जो दर्शकों को थोड़ा एंटरटेन करते हैं।

    कमजोर कड़ी: फिल्म के कुछ सीन्स जैसे भूतिया हवेली वाला सीक्वेंस और कमजोर वीएफएक्स (VFX) थोड़ा खटकते हैं। साथ ही, कुछ एडल्ट जोक्स के कटने के बावजूद (सेंसर बोर्ड के सुझावों के बाद) कुछ जोक्स काफी घिसे-पिटे लगते हैं, जो केवल बच्चों को पसंद आ सकते हैं।

    देखें या न देखें?

    ‘धमाल 4’ एक साफ-सुथरी, बिना वल्गर कॉमेडी वाली पारिवारिक फिल्म है जिसे आप बच्चों के साथ देख सकते हैं। हालांकि यह अपनी पहली फिल्म (2007) के बेंचमार्क को नहीं छू पाती, लेकिन यदि आप बिना दिमाग लगाए सिर्फ हंसना चाहते हैं, तो इसे एक बार देख सकते हैं। अंत में, फिल्म के मेकर्स ने ‘धमाल 5’ का हिंट भी छोड़ दिया है।

    RELATED ARTICLES

    Most Popular

    Recent Comments