अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से पर्दे के पीछे चल रही शांति वार्ता और समझौता पूरी तरह से खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। वाशिंगटन में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन (NATO Summit) के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा ईरान पर फूट पड़ा। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कतर एलएनजी टैंकर पर हुए हालिया हमले और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि तेहरान (ईरान) के साथ किसी भी तरह की बातचीत करना अब महज “समय की बर्बादी” है।
ट्रंप का कड़ा बयान: “वे जहाजों पर रॉकेट दाग रहे हैं”
नाटो देशों के राष्ट्राध्यक्षों को संबोधित करते हुए और बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के नेतृत्व को आड़े हाथों लिया। ट्रंप ने कहा, “ईरान के साथ किसी भी तरह का सौदा या वार्ता करना अब पूरी तरह से समय की बर्बादी है। वे एक तरफ टेबल पर बातचीत का ढोंग करते हैं, और दूसरी तरफ हमारे और हमारे सहयोगियों के जहाजों पर रॉकेट और ड्रोन दाग रहे हैं। वे ‘बीमार लोग’ (Sick People) हैं, जो केवल अस्थिरता फैलाना जानते हैं।”
ट्रंप का यह गुस्सा हाल ही में कतर के एलएनजी लदे जहाज ‘अल रेकय्यात’ पर होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए ड्रोन हमले और इराक-सीरिया में अमेरिकी सेना पर दागे गए रॉकेटों के बाद सामने आया है। कतर ने भी इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया था।
क्या टूट गया ईरान-अमेरिका समझौता?
पिछले कुछ हफ्तों से ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच इस रणनीतिक समुद्री रास्ते (Strait of Hormuz) को सुरक्षित रखने और तनाव कम करने के लिए एक अस्थाई समझौते पर बातचीत चल रही थी। लेकिन ट्रंप के इस ताजा बयान के बाद यह साफ हो गया है कि वह समझौता अब आधिकारिक रूप से रद्द होने की कगार पर है।
- वार्ता पर पूर्णविराम: अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जब तक ईरान समर्थित हुती या उसकी अपनी नौसेना जहाजों पर हमले नहीं रोकती, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी।
- सैन्य कार्रवाई के संकेत: ट्रंप ने नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और ईरान को उसकी हरकतों का “करारा जवाब” देने की चेतावनी दी है।
वैश्विक बाजारों और सुरक्षा पर मंडराया संकट
ट्रंप के इस कड़े रुख और समझौते के टूटने की खबरों से वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य एक बार फिर गरमा गया है:
- क्रूड ऑयल और गैस की कीमतों में उछाल: होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% तेल और एलएनजी गुजरता है। यहां तनाव बढ़ने और बातचीत टूटने से कच्चे तेल और गैस की कीमतों में अचानक 5% से अधिक की तेजी देखी गई है।
- थ्रेट लेवल हुआ हाई: समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने इस रूट के लिए थ्रेट लेवल को बढ़ाकर “Severe” (गंभीर) कर दिया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका है।
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की भी पैनी नजर है, क्योंकि कतर से भारत आने वाले एलएनजी जहाजों की सुरक्षा और घरेलू तेल की कीमतें सीधे तौर पर इस टकराव से जुड़ी हुई हैं। फिलहाल, ट्रंप के तेवरों ने साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल छटने वाले नहीं हैं।


