पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंजाब कांग्रेस एक बार फिर अंदरूनी कलह और गुटबाजी के पुराने भंवर में फंसती नजर आ रही है. साल 2021 में जिस तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच चली आपसी तनातनी ने पार्टी को सत्ता से बाहर कर दिया था, ठीक वैसा ही इतिहास अब पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच वर्चस्व की लड़ाई के रूप में खुद को दोहराता दिख रहा है. हाईकमान द्वारा किए गए हालिया संगठनात्मक बदलावों के बाद पंजाब कांग्रेस में बगावत के सुर तेज हो गए हैं.
चन्नी का शक्ति प्रदर्शन और राजा वड़िंग को हटाने की मांग
विवाद की ताजा चिंगारी तब भड़की जब ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) ने पंजाब में संगठनात्मक फेरबदल करते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा, जबकि पूर्व सीएम और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी को केवल चुनाव प्रचार समिति (Campaign Committee) का अध्यक्ष नियुक्त किया.
इस फैसले से नाराज चन्नी कैंप ने तुरंत बगावती रुख अपना लिया:
- मोरिंडा में बड़ी बैठक: फैसले के तुरंत बाद चन्नी ने मोरिंडा स्थित अपने आवास पर 4 मौजूदा विधायकों समेत करीब 50 वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और समर्थकों की एक गुप्त बैठक बुलाई.
- वड़िंग को हटाने की मांग: बैठक में शामिल वरिष्ठ विधायक तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने खुलकर मीडिया के सामने कहा कि वे राजा वड़िंग को अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले पर खुश नहीं हैं और वे चन्नी को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपने के लिए हाईकमान के सामने अपनी बात रखेंगे.
राजा वड़िंग का पलटवार: “कोई गुटबाजी नहीं, चन्नी मेरे भाई जैसे”
चन्नी कैंप के इस बड़े शक्ति प्रदर्शन के बाद मचे सियासी बवाल पर प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की है. उन्होंने किसी भी तरह की अंतर्कलह से इनकार करते हुए कहा:
- चन्नी मेरे भाई हैं: वड़िंग ने कहा कि चन्नी पार्टी के बेहद सम्मानित और वरिष्ठ नेता हैं. उनके घर पर कांग्रेस नेताओं का जुटना कोई असामान्य बात नहीं है.
- अनुशासनहीनता पर कार्रवाई: हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर चेतावनी भी दी कि अगर कोई नेता पार्टी के अनुशासन के खिलाफ जाकर बयानबाजी करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी. वड़िंग ने यह भी साफ किया कि वे मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल नहीं हैं और चेहरा तय करना राहुल गांधी का काम है.
सांसद रंधावा और शाह की मुलाकात से बढ़ीं धड़कनें
कांग्रेस के भीतर चल रहा यह ड्रामा सिर्फ चन्नी और वड़िंग तक ही सीमित नहीं है. इसी खींचतान के बीच गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात ने पंजाब के सियासी गलियारों में नई अटकलों को हवा दे दी है. हालांकि, रंधावा ने इस मुलाकात को केवल पंजाब की कानून-व्यवस्था से जुड़ी एक औपचारिक बैठक बताया है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले ऐसी मुलाकातों ने हाईकमान की चिंताएं जरूर बढ़ा दी हैं.
क्या होगा कांग्रेस का भविष्य?
2022 के चुनावों में कांग्रेस की करारी हार की सबसे बड़ी वजह यही अंदरूनी गुटबाजी थी. अब जब राज्य में आम आदमी पार्टी (AAP) सत्ता में है और मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने खड़ी है, ऐसे में चुनाव से ठीक पहले चन्नी और वड़िंग के गुटों का आमने-सामने आना कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है. यदि कांग्रेस हाईकमान ने समय रहते इस ‘वर्चस्व की जंग’ को शांत नहीं किया, तो पंजाब में पार्टी का हश्र एक बार फिर 2022 जैसा ही हो सकता है


