पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में पाकिस्तानी हुकूमत और वहां की सेना के खिलाफ बगावत अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है. बुनियादी अधिकारों के हनन, आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत और लगातार हो रहे दमन के विरोध में वहां की जनता सड़कों पर है. इस आंदोलन के बड़े नेताओं ने अब भारत और वहां की जनता से सीधे मदद की गुहार लगाई है, जिससे इस्लामाबाद के हुक्मरानों की नींद उड़ गई है. वहीं, इस अत्याचार की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दे रही है और लंदन की सड़कों पर हजारों प्रवासियों ने पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
भारत से गुहार: “हम सीजफायर लाइन तोड़ना चाहते हैं”
PoJK में नागरिक अधिकारों के लिए लड़ रहे प्रमुख संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के शीर्ष नेताओं ने पाकिस्तान के बर्बर दमन के खिलाफ भारत से खुले तौर पर समर्थन मांगा है.
- सरदार अमान खान का संदेश: सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो संदेश में जेएएसी के मुख्य सदस्य सरदार अमान खान ने कहा कि पाकिस्तान ने PoJK के लोगों पर जुल्म, कत्लेआम और सैन्य आक्रामकता को चरम पर पहुंचा दिया है. हमारे राशन और दवाओं के रास्ते बंद कर दिए गए हैं.
- नियंत्रण रेखा (LoC) पार करने का आह्वान: अमान खान ने श्रीनगर, जम्मू, लद्दाख, पुंछ और राजौरी के भारतीय नागरिकों से एकजुटता दिखाने की अपील करते हुए कहा, “हम सीजफायर लाइन (LoC) का खात्मा चाहते हैं और हमें आपके समर्थन की जरूरत है। अगर हमें दबाया गया, तो हम आगे कदम बढ़ाएंगे।”
क्यों धधक रहा है PoJK?
हाल ही में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर की गई सीधी फायरिंग के बाद से तनाव चरम पर है, जिसमें कई नागरिकों की मौत हो गई थी.
- 600 से अधिक कार्यकर्ता गिरफ्तार: पाकिस्तान सरकार ने दमनकारी रुख अपनाते हुए जेएएसी के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर सहित 600 से अधिक नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया है.
- आर्थिक नाकेबंदी: स्थानीय प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने पूरे क्षेत्र की आर्थिक नाकेबंदी कर दी है, जिससे इंटरनेट ठप है और जरूरी चीजों के लिए लोग तरस रहे हैं. इसके खिलाफ 5 जुलाई को पूरे क्षेत्र में व्यापक ‘ब्लैक डे’ और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए.
लंदन की सड़कों पर क्यों उतरे हजारों लोग?
PoJK में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता के खिलाफ रविवार (5 जुलाई 2026) को ब्रिटेन की राजधानी लंदन में एक ऐतिहासिक ‘मिलियन मार्च’ निकाला गया. पार्लियामेंट स्क्वायर से लेकर पाकिस्तानी उच्चायोग (High Commission) तक हुए इस मार्च में करीब 50,000 कश्मीरी प्रवासियों ने हिस्सा लिया.
- वैश्विक आक्रोश: प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर पाकिस्तानी सेना और वहां की सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. उन्होंने शौकत नवाज मीर और अन्य राजनीतिक बंदियों को तुरंत रिहा करने की मांग की.
- बलोच और पश्तूनों का साथ: इस मार्च की सबसे खास बात यह रही कि पाकिस्तान से आजादी और अधिकारों की मांग कर रहे बलोच और पश्तून समुदायों के लोग भी बड़ी संख्या में इस आंदोलन में शामिल हुए. सभी ने एकजुट होकर वैश्विक समुदाय से मांग की है कि पाकिस्तान की इस दमनकारी नीति और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर तुरंत अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए जाएं.
भारत हमेशा से यह रुख दोहराता रहा है कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है. ताजा घटनाक्रम ने पाकिस्तान के इस अवैध नियंत्रण की कमजोर होती नींव को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है.


