भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बढ़ते तनाव को कम करने और द्विपक्षीय बातचीत को दोबारा शुरू करने के लिए दोनों देशों के 100 से अधिक प्रमुख नागरिकों ने एक साझा पहल की है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हुमायूं कबीर समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक संयुक्त पत्र (चिट्ठी) भेजा है।
बातचीत और कूटनीति की बहाली की मांग
दोनों देशों के नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) के सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में दोनों प्रधानमंत्रियों से अपील की गई है कि वे अतीत की कड़वाहट को भूलकर आधिकारिक स्तर पर बातचीत का रास्ता साफ करें। चिट्ठी में साफ तौर पर कहा गया है कि दक्षिण एशिया में दीर्घकालिक शांति और सुरक्षा के लिए कूटनीतिक संवाद (Diplomatic Dialogue) को फिर से शुरू करना बेहद जरूरी है।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख चेहरे
इस साझा शांति संदेश को दोनों देशों के पूर्व नौकरशाहों, सैन्य अधिकारियों, शिक्षाविदों, जजों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का बड़ा समर्थन मिला है। हस्ताक्षरित प्रमुख लोगों में शामिल हैं:
- फारूक अब्दुल्ला: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष।
- हुमायूं कबीर: सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री।
- मनीष तिवारी व मणिशंकर अय्यर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री।
- पाकिस्तानी प्रतिनिधि: पाकिस्तान की ओर से भी पूर्व राजनयिकों, सीनेटरों और कई नागरिक समाज के नेताओं ने इस डिजिटल अपील पर हस्ताक्षर किए हैं।
व्यापार, यात्रा और सहयोग पर जोर
पत्र में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि दोनों देशों के बीच संवादहीनता (Communication Gap) का सबसे बुरा असर आम जनता, सीमावर्ती इलाकों के निवासियों और व्यापारियों पर पड़ रहा है। शांति बहाली के लिए चिट्ठी में कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं:
- व्यापार को दोबारा शुरू करना: बंद पड़े वाघा-अटारी और अन्य व्यापारिक मार्गों को फिर से खोलना ताकि आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।
- धार्मिक पर्यटन और वीज़ा नियमों में ढील: दोनों देशों के नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों और तीर्थयात्रियों के लिए वीज़ा प्रक्रियाओं को सरल बनाना।
- जलवायु और पर्यावरण पर सहयोग: दक्षिण एशिया में बढ़ते वायु प्रदूषण (जैसे स्मॉग की समस्या) और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से मिलकर लड़ने की आवश्यकता।
अपील का मुख्य संदेश: “युद्ध या तनाव किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इतिहास गवाह है कि बड़े से बड़े विवादों का अंत आखिरकार बातचीत की मेज पर ही होता है।” पत्र में दोनों देशों के नेतृत्व से आग्रह किया गया है कि वे आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएं और शांति की एक नई शुरुआत करें।


