मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी से सियासी हलचल तेज हो गई है। मोहन यादव सरकार में नगरीय प्रशासन मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के एक ताजा बयान ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। उन्होंने अफसरों और कर्मचारियों के ‘आरएसएस प्रेम’ पर तीखा कटाक्ष किया है।
कैलाश विजयवर्गीय ने क्या कहा?
भोपाल के मानस भवन में आयोजित एक स्मृति समारोह को संबोधित करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने प्रशासनिक अधिकारियों पर निशाना साधा:
“हमारी सरकार आने के बाद राज्य का हर छोटा-बड़ा अधिकारी और कर्मचारी खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा हुआ बताने की होड़ में जुटा है। जब भी कोई अधिकारी मुझसे मिलने आता है, तो कहता है— ‘सर, मैं फलां जगह था तो वहां शाखा में जाता था। मैंने भी पट्टी बांधी है, बेल्ट लगाई है और चड्डी पहनी है। सरकार बनने से पहले तो किसी ने कभी यह नहीं बताया था।”
उन्होंने तंज कसते हुए एक मजेदार वाकया भी सुनाया:
- मनगढ़ंत पद: विजयवर्गीय ने कहा, “एक अधिकारी ने तो मुझसे आकर यहां तक कह दिया कि उसके पिताजी आरएसएस की शाखा के अध्यक्ष थे। अब मैं उससे क्या बोलूं, क्योंकि संघ में ऐसा कोई पद (अध्यक्ष) होता ही नहीं है।”
- भीड़ और अच्छे लोगों की कमी: उन्होंने संगठन की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज संघ की विचारधारा बढ़ रही है और भीड़ भी बहुत हो गई है, लेकिन इस भीड़ में ‘अच्छे इंसानों’ की कमी होती जा रही है, जिस पर हमें आत्म-मंथन करने की जरूरत है।
कांग्रेस का पलटवार: ब्यूरोक्रेसी की निष्पक्षता पर सवाल
कैलाश विजयवर्गीय के इस सार्वजनिक बयान के बाद विपक्ष को सरकार को घेरने का बड़ा मौका मिल गया है।
- जीतू पटवारी का हमला: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसे बेहद गंभीर और संवैधानिक चिंता का विषय बताया है।
- तटस्थता को खतरा: कांग्रेस का आरोप है कि यदि राज्य के प्रशासनिक तंत्र और नौकरशाही (Bureaucracy) में खुद को किसी खास संगठन से जोड़कर दिखाने की ऐसी होड़ मची है, तो यह भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता, तटस्थता और संवैधानिक मर्यादा के साथ खुला खिलवाड़ है।


