दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तेजी से रफ्तार पकड़ चुका है और उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 3 से 4 दिनों में मानसून का दायरा बढ़कर उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश तक पहुँचने की उम्मीद है। हालाँकि, कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी और लू (heatwave) से फिलहाल तुरंत राहत मिलने के आसार नहीं हैं।
मानसून की प्रगति और भारी बारिश का अलर्ट
मानसून के सक्रिय होने से देश के पूर्वी, पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश का दौर शुरू होने वाला है। IMD ने कई राज्यों के लिए चेतावनी जारी की है:
- पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत: उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और मेघालय में 27 से 29 जून के बीच अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है। इसके अलावा बिहार, झारखंड और ओडिशा में भी 1 जुलाई तक अलग-अलग दिनों में मूसलाधार बारिश जारी रहेगी। निचले इलाकों में जलभराव और भूस्खलन (landslide) का खतरा जताया गया है।
- पहाड़ी राज्य (उत्तराखंड और हिमाचल): उत्तराखंड में 29 जून से 1 जुलाई और हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर में 30 जून से 1 जुलाई के बीच व्यापक वर्षा की संभावना है। इन क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर गरज-चमक के साथ बारिश और 40 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
उत्तर भारत में गर्मी का प्रभाव और मुख्य चुनौतियां
एक तरफ जहाँ मानसून आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर भारत के मैदानी इलाकों को अभी भी लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम प्रणाली में आ रहे इस बदलाव के कारण कुछ प्रमुख चिंताएं सामने आई हैं,
कृषि पर असर: मानसून की शुरुआती सुस्ती के कारण महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों में खरीफ फसलों की बुवाई में 85% तक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, अब मानसून की इस रफ्तार से किसानों को उम्मीद बंधी है।
- दोहरी मौसम स्थिति: उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में उमस और भीषण गर्मी का दौर जारी है। मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद ही तापमान में गिरावट आएगी।
- यातायात और बुनियादी ढांचा: पहाड़ी इलाकों में तेज आंधी और भारी बारिश के कारण यातायात बाधित होने और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचने की आशंका है।
मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को बदलते मौसम और भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है।


