अयोध्या के श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में हुए गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। मामले की जांच के लिए गठित की गई विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी विस्तृत प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इस 150 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में मंदिर के चढ़ावे की चोरी से लेकर निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी और वित्तीय कुप्रबंधन के कई चौंकाने वाले साक्ष्य सामने आए हैं, जिसके बाद ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
चढ़ावे में गबन और ‘टिन्नू यादव’ का कबूलनामा
SIT की जांच में यह साफ हो गया है कि रामलला को भक्तों द्वारा अर्पित की जाने वाली दान राशि और आभूषणों की हेराफेरी बड़े पैमाने पर की जा रही थी। इस मामले के मुख्य संदिग्ध और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पूर्व चालक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव से लगातार तीन दिनों तक कड़ी पूछताछ की गई।
- गवाहों के बयान: टिन्नू यादव और अन्य बैंक व गणना कर्मियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि दान राशि की गिनती और उसे जमा करने की आड़ में लंबे समय से गबन का खेल चल रहा था।
- लापरवाही और साक्ष्य: लगभग 150 लोगों से पूछताछ के बाद करीब 30 लोगों की भूमिका इसमें संदिग्ध पाई गई है। भक्तों द्वारा चढ़ाए गए कई सोने-चांदी के आभूषणों की न तो रसीदें काटी गईं और न ही वे मंदिर के रिकॉर्ड में दिखे।
चंपत, अनिल और गोपाल राव पर उठते गंभीर सवाल
एसआईटी की इस प्रारंभिक रिपोर्ट ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शीर्ष प्रबंधन को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है:
- डॉ. अनिल मिश्रा (ट्रस्ट सदस्य): पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा द्वारा डॉ. अनिल मिश्रा पर निर्माण कार्यों में 40 फीसदी कमीशन लेने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। गवाहों के बयानों और बयानों के मिलान (Cross Verification) में अनिल मिश्रा की भूमिका को बेहद संदिग्ध माना गया है।
- गोपाल राव (व्यवस्थापक/निर्माण सहायक): टिन्नू यादव ने दान राशि के प्रबंधन और हेराफेरी के तंत्र में गोपाल राव का नाम प्रमुखता से लिया है। इनके खिलाफ भी एसआईटी को ठोस सबूत मिले हैं।
- चंपत राय (महासचिव): यद्यपि कुछ सूत्रों के अनुसार चंपत राय को सीधे तौर पर इस गबन की जानकारी न होने की बात कही जा रही है, लेकिन ट्रस्ट के सर्वेसर्वा होने के नाते प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय पारदर्शिता न रख पाने के कारण वे मुख्य रूप से जिम्मेदार माने गए हैं। कूटनीतिक और कानूनी स्तर पर उन पर सवालिया निशान खड़े हैं।
SIT की प्रमुख संस्तुतियां और कड़ा एक्शन
जांच टीम (जिसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत और आईजी रेंज किरन एस शामिल हैं) ने रिपोर्ट में बेहद कड़े कदम उठाने की सिफारिश की है:
विदेश/अयोध्या छोड़ने पर रोक: एसआईटी ने संस्तुति की है कि जांच पूरी होने तक महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और व्यवस्थापक गोपाल राव सहित सभी संबंधित जिम्मेदारों के अयोध्या या देश से बाहर जाने पर रोक लगाई जाए।
- ट्रस्ट का पुनर्गठन: एसआईटी ने सबसे बड़ी संस्तुति यह की है कि वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राम मंदिर ट्रस्ट का पूरी तरह से पुनर्गठन किया जाए।
- CEO की नियुक्ति: श्री काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर राम मंदिर के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन के लिए एक आईएएस (IAS) स्तर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की जाए, ताकि ट्रस्टियों का सीधा दखल कम हो सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इस पवित्र स्थल की आस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी “चंदा चोर” को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही इस मामले में बड़ी गिरफ्तारियां और एफआईआर (FIR) देखने को मिल सकती हैं।


