अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं और संस्थाओं द्वारा अर्पित की गई बहुमूल्य धातुओं के रिकॉर्ड को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विशेष रूप से प्राण प्रतिष्ठा और मंदिर निर्माण के विभिन्न चरणों के दौरान दान की गई चांदी की सिल्लियों और आभूषणों का आधिकारिक रिकॉर्ड न मिलने के कारण दानदाता अब ट्रस्ट से पूरा हिसाब मांग रहे हैं।
विवाद का मुख्य कारण
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जांच में सामने आया कि ‘इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन’ (IBJA) द्वारा दान की गई 60 किलोग्राम चांदी की सिल्लियां (Silver Bars) मंदिर के आधिकारिक इन्वेंट्री रिकॉर्ड से गायब हैं।
- दानदाताओं का दावा: एसोसिएशन के उत्तर भारत प्रमुख अनुराग रस्तोगी के अनुसार, देश भर के सर्राफा व्यापारियों से चांदी एकत्र कर ये सिल्लियां बनाई गई थीं, जिन पर दानदाताओं के नाम और गोत्र भी अंकित थे। एसोसिएशन के पास इसकी रसीद तो है, लेकिन मंदिर की नींव या आधिकारिक रिकॉर्ड में इसका कोई स्पष्ट अता-पता नहीं है।
- लापता अन्य बहुमूल्य सामग्रियां: चांदी की सिल्लियों के अलावा, जौनपुर के एक श्रद्धालु परिवार द्वारा 200 किलोमीटर पैदल चलकर चढ़ाई गई 3 किलो की चांदी की माला, चांदी की चरण पादुकाएं, कीमती हार और ‘नाग-नागिन’ का जोड़ा भी मंदिर के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं मिला है, जिससे भक्तों में असंतोष है।
प्रशासनिक कार्रवाई और SIT जांच
विवाद के राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ने के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी एस. किरण और विशेष सचिव नील रतन कुमार की अध्यक्षता वाली SIT इस पूरे मामले की कड़ाई से जांच कर रही है।
- पूछताछ के घेरे में मुख्य पदाधिकारी: SIT ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव सहित कई पुजारियों और कर्मचारियों से गहन पूछताछ की है।
- 150 संदिग्धों की पहचान: जांच एजेंसी ने करीब 150 संदिग्धों को चिह्नित किया है, जिनमें से 25 के खिलाफ जल्द ही कड़ी कार्रवाई हो सकती है। अब तक लगभग ₹2 करोड़ की नकदी भी बरामद की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री और वीएचपी का रुख
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के दौरान श्रद्धालुओं से धैर्य रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि “जिस समाज ने मंदिर के लिए 500 वर्षों का इंतजार किया है, वह जांच रिपोर्ट आने तक थोड़ा संयम रखे।” उन्होंने किसी भी भ्रामक प्रचार से बचने और अयोध्या की छवि को नुकसान न पहुंचाने की हिदायत दी है।
वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने इस विवाद को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विहिप का कहना है कि श्रद्धा से अर्पित की गई धनराशि को ‘चंदा’ कहना आस्था का अपमान है। उन्होंने यह भी मांग की है कि बिना सबूत के मंदिर प्रबंधन पर झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल, सभी पक्षों की नजरें SIT द्वारा जल्द ही मुख्यमंत्री को सौंपी जाने वाली अंतरिम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।


